प्रदूषण से जंग : धूप-अगरबत्ती, पटाखों का इस्तेमाल बंद करने के लिए मंदिरों की पहल

नई दिल्ली (9 मई): ताइवान के मंदिरों से रोज ही काफी मात्रा में धुंआ उत्सर्जित होता है। मंदिरों में आने वाले श्रृद्धालु यहां आकर धूप और पेपर मनी जलाते हैं। जिससे उन्हें अच्छी किस्मत और समृद्धि मिल सके। लेकिन यहां के लिए यह आम बात हो चुका सुगंधित धुंआ जल्द ही पुरानी बात हो जाएगी।

यहां के मंदिरों ने फैसला किया है कि धार्मिक कर्मकांडों में इस्तेमाल होने वाली ऐसी चीजों के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए, जिनकी वजह से प्रदूषण होता है।

'फ्रांस24' की रिपोर्ट के मुताबिक, धार्मिक कर्मकांडों में इस्तेमाल होने वाली चीजों से श्रृद्धालुओं के स्वास्थ्य को होने वाले संभावित खतरे को देखते हुए कुछ मंदिरों और त्यौहारों के लिए विकल्प तलाशे जा रहे हैं। 

सेंट्रल शैंगुआ सिटी में स्थित लोकप्रिय ताओइस्ट नैन याओ मंदिर असली आतिशबाजी की जगह इनकी सीडीज़ प्ले की जा रही हैं। यह मंदिर आइसलैंड का सबसे बड़ा और पुराना मंदिर है। इसके अलावा अनुयायियों से ताली बजाकर पटाखों की तरह आवाज़ करने के प्रोत्साहित किया जा रहा है।

लोकप्रिय ताओइस्ट सिंग च्यान कॉन्ग मंदिर ने पूजा करने वालों के धूप जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह राजधानी ताइपे में स्थित है। यहां लोगों से अगरबत्तियां जलाने की जगह सीधे केवल हाथ जोड़कर प्रार्थना करने के लिए कहा जा रहा है। 

इसके अलावा दूसरे मंदिर पेपर ऑफरिंग्स को सरकारी भट्टियों में जलाए जाने के लिए भेज रहे हैं। जिससे धुंए का ट्रीटमेंट किया जा सके। इसी तरह ताइपे में नदी में बहाए जाने वाले कंदीलों को भी मंदिर के बाहर कंदीलों की एक वॉल बनाकर उनकी जगह ली जा रही है।

ताइवान में इन्वायरनमेंटल ग्रुप एयर क्लीन के संस्थापक येह ग्वांग पर्ऩ्ज ने कहा, "लोग मंदिरों में अच्छे स्वास्थ्य के लिए पूजा करने आते हैं। लेकिन जिस तरह से वे पूजा कर रहे हैं। वह स्वस्थ तरीका नहीं है।"

ताइवान में ताओवाद और बौद्ध धर्म प्रमुख धर्म हैं। इनके अनुयायी लाखों की संख्या में हैं।