सुलझा रिलायंस-एयरटेल विवाद, जियो की कॉल को देगी नेटवर्क

नई दिल्ली (13 सितंबर): रिलायंस जियो को लेकर भारती एयरटेल ने बड़ा ऐलान किया है। एयरटेल ने कहा है कि वह रिलायंस की वॉयस कॉल लेने के लिए तैयार है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ट्राई ने दोनों कंपनियों के बीच पैदा हुए कॉल कनेक्टिविटी विवाद का समाधान कराया है।

इस विवाद की शुरुआत रिलायंस द्वारा अन्य टेलिकॉम कंपनियों पर आरोप लगाने से शुरू हुई, जिसमें कंपनी ने कहा था कि अन्य टेलिकॉम कंपनिया रिलायंस जियो की कॉल को अपने नेटवर्क पर कनेक्ट नहीं होने दे रही है, जिससे रिलायंस जियो की काफी संख्या में कॉल ड्रॉप हो रही हैं। वहीं अन्य टेलीकॉम कंपनियों का कहना था कि रिलायंस जियो द्वारा 'मुफ्त कॉल' की वजह से उनके नेटवर्क पर ट्रैफिक बहुत अधिक हो गया है, जिससे की इंटरकनेक्ट करने में परेशानी हो रही है।

दरअसल, इंटरकनेक्ट पॉइंट के जरिये ही एक कंपनी के सिम से किया गया फोन दूसरी कंपनी के सिम पर पूरा होता है। कंपनियों की दलील है कि अब तक जितने इंटरकनेक्ट प्वाइंट मुहैया कराए गए, वो टेस्ट सर्विस के लिए पर्याप्त हैं। इतना ही नहीं, अन्य दूरसंचार कंपनियों ने दूरसंचार नियामक ट्राई के सामने कॉल ट्रांसफर दर बढ़ाने की मांग रखी हैं। इसकी कीमत ट्राई ने 14 पैसे प्रति सेकेंड रखी है, इसी चार्ज को टेलीकॉम कंपनियां बढ़वाना चाहती हैं।

कुछ इस तरह हुई रिलायंस की 4जी में इंट्री... जून 2010 में यूपीए सरकार ने ब्रॉडबैंड और वायरलेस एक्सेस (बीडब्ल्यूए) की नीलामी का आयोजन किया था। नीलामी में केवल एक कंपनी इंफोटेल ब्रॉडबैंड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (आईबीएसपीएल) सभी सर्किलों के लिए सिर्फ 12,750 करोड़ रुपये में बीडब्ल्यूए(4जी) स्पेक्ट्रम हासिल करने में कामयाब रही। बीडब्ल्यूए स्पेक्ट्रम मिलने के कुछ एक हफ्ते बाद ही अरबपति मुकेश अंबानी के नेतृत्‍व वाली रिलायंस जियो इंफोकॉम ने इस कंपनी का अधिग्रहण कर लिया। इस तरह बिना नीलामी में शामिल हुए ही आरआईएल को पूरे देश में स्पेक्ट्रम  हासिल हो गए।