BREAKING: रिलायंस ग्राहकों को बड़ा झटका, 1 दिसंबर से बंद होगी वॉइस कॉलिंग

नई दिल्ली (4 नवंबर): अगर आप अभी तक रिलायंस की वॉइस कॉल सर्विस का जमकर जमा ले रहे थे तो यह खबर आपके लिए अच्छी नहीं है, क्योंकि रिलायंस कम्‍यूनिकेशंस (RCom) एक दिसंबर से अपनी वॉइस कॉल सर्विस बंद कर देगी और इसके ग्राहक इस साल के अंत तक अन्‍य नेटवर्क पर पोर्ट कर सकते हैं।

टेलीकॉम नियामक ट्राई ने इस संबंध में कंपनी को अपनी मंजूरी दे दी है। सभी टेलीकॉम ऑपरेटर्स को दिए अपने निर्देश में ट्राई ने कहा है कि आरकॉम ने 31 अक्‍टूबर, 2017 को उसे यह जानकारी दी थी कि आरसीएल (रिलायंस कम्‍यूनिकेशंस लिमिटेड) अपने ग्राहकों को केवल 4G डाटा सर्विस ही उपलब्‍ध कराएगी और इसके परिणामस्‍वरूप वह अपने उपभोक्‍ताओं को वॉइस सर्विस 1 दिसंबर 2017 से देना बंद करेगी।

आरकॉम ने ट्राई को सूचना दी है कि वह आठ टेलीकॉम सर्किल-आंध्र प्रदेश, हरियाणा, महाराष्‍ट्र, उत्‍तर प्रदेश पूर्व और पश्चिम, तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल- में 2G और 4G सर्विस उपलब्‍ध करवा रही है। अनिल अंबानी के नेतृत्‍व वाली इस कंपनी ने ट्राई को यह बताया है कि कंपनी दिल्‍ली, राजस्‍थान, उत्‍तर प्रदेश पश्चिम, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, गुजरात और कोलकाता में 4G सर्विस उपलब्‍ध कराने के लिए सिस्‍टेमा श्‍याम टेलीसर्विसेस के सीडीएमए नेटवर्क को अपग्रेड करेगी, जिसका इसके साथ विलय हो चुका है।

ट्राई ने बताया कि आरकॉम ने उसे सूचित किया है कि उसने वॉइस कॉल को बंद करने संबंधी आवश्‍यक सभी जानकारी अपने उपभोक्‍ताओं को दे दी है। कंपनी ने अपने उपभोक्‍ताओं को किसी भी ऑपरेटर के साथ पोर्ट करने का भी विकल्‍प दिया है, जो कंपनी की 4G डाटा सर्विस के साथ बने नहीं रहना चाहते हैं। नियामक ने आरकॉम को निर्देश दिया है कि वह किसी भी पोर्टिंग आवेदन को अस्‍वीकार नहीं करेगी। ट्राई ने सभी टेलीकॉम ऑपरेटर्स से 31 दिसंबर 2017 तक आरकॉम ग्राहकों के ऐसे आवेदन स्‍वीकार करने के लिए भी कहा है।

आरकॉम के ऊपर 46,000 करोड़ रुपए का ऋण बकाया है और एयरसेल के साथ अपने वायरलेस बिजनेस के विलय के असफल होने के बाद उसने अपनी वॉइस कॉल सर्विस को बंद करने का फैसला लिया है। पिछल साल सितंबर में आरकॉम और एयरसेल ने अपने मोबाइल बिजनेस का आपस में विलय करने के लिए समझौते पर हस्‍ताक्षर किए थे। आरकॉम ने कहा कि कानूनी और नियामकीय अनिश्‍चितताओं, हितधारी पक्षों की आपत्तियों तथा संबंधित मंजूरियों को हासिल करने में हुई देरी की वजह से यह समझौता पूरा नहीं हो सका।