भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार डालने की घटनाओं पर बोले राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी

नई दिल्ली(2 जुलाई): भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार डालने और कानून हाथ में लेने की घटनाओं के मुद्दे पर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जब भीड़ का उन्माद बहुत ज्यादा 'अतार्किक और नियंत्रण से बाहर' हो जाए तो हमें रुककर विचार करना चाहिए कि क्या हम अपने समय के मूलभूत मूल्यों को बचाने के लिए पर्याप्त रूप से सजग हैं? उन्होंने बौद्धिक वर्ग से इस मुद्दे पर मुखर और सजग होने की गुजारिश की।


- राष्ट्रपति ने कहा कि नागरिकों की समझदारी और मीडिया की सजगता अंधकार और पिछड़ेपन की शक्तियों के लिए सबसे बड़े निवारक का काम कर सकती हैं।


- राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने 'नैशनल हेरल्ड' समाचार पत्र को फिर से पेश किए जाने के अवसर पर राजधानी के जवाहर भवन में शनिवार को आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा, 'जब हम अखबारों में पढ़ते हैं या टीवी में देखते हैं कि कानून का पालन या नहीं पालन करने के कारण किसी व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई, जब भीड़ का उन्माद बहुत बढ़ जाता है, अनियंत्रित और अतार्किक हो जाता है तो हमें रुककर इस बात पर विचार करना चाहिए कि क्या हम पर्याप्त रूप से सजग हैं।'


-मुखर्जी ने कहा, 'मैं चौकसी के नाम पर भीड़ द्वारा कानून हाथ में लेने की बात नहीं कर रहा हूं। मैं बात कर रहा हूं कि क्या हम सक्रिय रूप से अपने देश के बुनियादी सिद्धान्तों की रक्षा के प्रति सजग हैं?' उन्होंने कहा, ' हम इसे सहन नहीं कर सकते। बुद्धिमत्ता हमसे स्पष्टीकरण मांगेगी कि हम क्या कर रहे थे। मैं भी अपने से यह सवाल करता था जब मैं एक युवा विद्यार्थी के रूप में इतिहास को पढ़ता था। राष्ट्रपति ने कहा, 'निरंतर सजगता ही स्वतंत्रता का मूल्य है। यह सजगता कभी परोक्ष नहीं हो सकती। इसे सक्रिय होना चाहिए। निश्चित तौर पर सजगता इस समय की आवश्यकता है।'


- राष्ट्रपति ने मीडिया से भी लगातार सजग रहने की अपील की क्योंकि इसी वजह से लोकतंत्र जिंदा है। उन्होंने कहा, 'क्योंकि आपके कारण लोकतंत्र का अस्तित्व बरकरार है। लोगों के अधिकार संरक्षित हैं। मानवीय गरिमा बरकरार है। गुलामी खत्म हुई है। आपको अपनी सजगता बरकरार रखनी होगी। माफ करें मैं इस शब्द (विजिलंट यानी सजगता) का बार बार इस्तेमाल कर रहा हूं क्योंकि मेरे पास कोई उपयुक्त वैकल्पिक शब्द नहीं है।'