जाधव मामला- पाकिस्तान को ICJ में थूक कर चाटना पड़ेगा, इससे कम पर नहीं गलेगी दाल

नई दिल्ली (23 मई): इंटरनैशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में पाकिस्तान की दाल नहीं गलने वाली है। ने कुलभूषण के मामले की  दोबारा सुनवाई की मांग की है लेकिन उसे कोई राहत मिलेगी, इसकी संभावना बहुत कम है। पाकिस्तान ने भारत को जाधव तक राजनयिक पहुंच न देकर वियना संधि का उल्लंघन किया था इसी वजह से इंटरनैशनल कोर्ट ऑफ जस्टिसने अपने अंतिम फैसले के आने तक जाधव की फांसी पर रोक लगाने का आदेश जारी किया। 

अगर पाकिस्तान इंटरनैशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के जूरिस्डिक्शन को चुनौती देता है तो अंतरराष्ट्रीय अदालत उसके पिटिशन की अलग से सुनवाई का फैसला ले सकती है। लेकिन इससे भारत को मिली अंतरिम राहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक पाकिस्तान इंटरनैशनल कोर्ट ऑफ जस्टिसनियमों के अनुच्छेद 76 का सहारा ले सकता है। इस अनुच्छेद के मुताबिक कोर्ट किसी पक्ष की गुजारिश पर जरूरी हुआ तो अपने अंतरिम फैसले या फाइनल जजमेंट को सशोधित कर सकता है या उसे वापस ले सकता है। इस अनुच्छेद का उपयोग पाकिस्तान तभी कर सकता है जब वो अदालत को यह विश्वास दिलाने में कामयाब हो जाये कि मामले की परिस्थितियां बदल चुकी हैं। 

यानी वो अंतर्राष्ट्रीय अदालत से कहे कि वो जाधव को फांसी नहीं देगा और सभी अंतरर्राष्ट्रीय कानूनों का पालन करेगा। तभी उसकी याचिका पर दोबारा सुनवाई संभव है। ऐसा करना पाकिस्तान को थूक कर चाटने जैसा होगा। नियम भी यही कहता है कि फैसले में संशोधन या उसे वापस लेने के लिए कोई भी गुजारिश तभी स्वीकार की जाएगी जब हालात में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव हुए हों। ऐसी किसी गुजारिश के बावजूद कोर्ट दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का मौका देगी।