आतंक के 'हाहाकार' में मानव तस्करों ने की 'रिकॉर्ड' आमदनी, बीते साल कमाए 6 अरब डॉलर

नई दिल्ली (17 जनवरी): दुनिया भर में जहां भी गृहयुद्ध, आतंकवाद, गरीबी, भुखमरी और सजा में मौत के डर से लोग घर-बार छोड़कर अनजान राह निकलने पर मजबूर हैं। वहां ऐसे ही लाखों बेबस लोगों की दुर्दशा मानव तस्करों के लिए कमाई का सुनहरा मौका बना हुआ है। लोगों की इसी मजबूरी का फायदा उठाते हुए पिछले साल मानव तस्करों ने तीन से छह अरब डॉलर की कमाई की। गौरतलब है, दुनिया में शरणार्थियों के पुनर्वासन की समस्या विकराल बनी हुई है।

यूरोपोल प्रमुख रॉब वेनराइट​ ने दी जानकारी

ब्रिटिश अखबार 'द इंडिपेंडेंट' की रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपोल के प्रमुख रॉब वेनराइट ने इस संबंध में कई बड़े खुलासे किए। उन्होंने कहा कि मानव तस्करों के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए सरकारों को इस अमानवीय उद्योग पर लगाम लगाने की सख्त जरूरत है। यह उद्योग अब मादक पदार्थों की तस्करी के बराबर व्यापक पैमाने पर फलफूल रहा है। यूरोपीय संघ के नए अध्ययन के मुताबिक, 90 फीसदी शरणार्थी अवैध तरीके से यूरोप पहुंचने के लिए किसी न किसी मानव तस्कर गिरोह को पैसे देते हैं। यह शोध 1500 शरणार्थियों से की गई बातचीत पर आधारित है। 

यूरोप यात्रा के लिए शरणार्थी मानव तस्करों को चुकाते हैं 3000-6000 डॉलर 

रिपोर्ट के मुताबिक, वेनराइट ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के अनुसार पिछले साल एक लाख से अधिक लोग अपनी जिंदगी को खतरे में डालकर समुद्री रास्ते से यूरोप पहुंचे हैं। इससे साफ पता चलता है कि मानव तस्करों ने इससे कितना पैसा कमाया है। वेनराइट ने कहा कि शरणार्थी यूरोप यात्रा के लिए मानव तस्करों को 3000 से 6000 डॉलर के बीच की रकम चुकाते हैं। इस आधार पर यह पता चलता है कि 2015 में उन्होंने तीन से छह अरब डॉलर की कमाई की। यह बहुत बड़ी रकम है और यह आंकड़ा सिर्फ यूरोप की यात्रा पर गत वर्ष निकलने वाले शरणार्थियों पर आधारित है। 

उप सहारा अफ्रीका से लेकर स्कैंडेनेविया तक फैला है मानव तस्करी का जाल

मानव तस्करी का अमानवीय कारोबार अब अरबों डॉलर का उद्योग बन गया है। इससे पहले इसका नेटवर्क इतना ज्यादा फैला हुआ नहीं था। मानव तस्करी का जाल उप सहारा अफ्रीका से लेकर स्कैंडेनेविया तक फैला है और लाखों लोग इस धंधे से जुड़े हैं।

वेनराइट ने बताया, ''पिछले साल अकेले यूरोपोल ने मानव तस्करी के धंधे में संलिप्त 10 हजार 700 लोगों को चिह्नित किया था, जिससे पता चलता है कि कितनी बड़ी संख्या में लोग इस नेटवर्क से जुड़े हैं। इस अमानवीय धंधे में छोटे मोटे अपराधी, फर्जी पासपोर्ट बनाने वाले और टैक्सी ड्राइवर भी जुड़े हैं। ये लोग शरणार्थियों को देश से बाहर, सीमा से बाहर ले जाने का काम करते हैं। बेहतर जिंदगी की तलाश में निकले लोग अपनी यात्रा के दौरान अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग मानव तस्करों के गिरोह को पैसे देते हैं।''

वेनराइट ने उदाहरण देते हुए बताया, ''सीरिया से भागने वाले नागरिक को सुरक्षाबलों की नजरों में आए बिना सीमा से निकलने के लिए गिरोह को पैसे देने होते हैं। इसके बाद उसे तुर्की में फर्जी पासपोर्ट खरीदने के पैसे देने होते हैं। फिर उसे यूनान की ओर निकलने वाली ठसाठस भरी रबर की छोटी नावों या नौकाओं में अपनी जगह बुक कराने के लिए पैसे देने पड़ते हैं।

यूरोप की सीमा में कई गुटों में लूटते हैं तस्कर

इस खौफनाक यात्रा के बाद भी अगर कोई सुरक्षित यूरोपीय तट पर पहुंचा, तो मानव तस्करों का दूसरा गिरोह उसे अन्य शरणार्थियों के साथ बाल्कन स्टेट से होते हुए पासपोर्ट फ्री शेनजेन जोन में ले जाने के लिए फिर से पैसे लेता है। इसके बाद ही शरणार्थी को जर्मनी, आस्ट्रिया और स्वीडन जैसे अमीर देशों में नए सिरे से जिंदगी जीने का अवसर मिलता है।

हालांकि हंगरी और यूरोप के कई देशों ने शरणार्थियों के लिए अपनी सीमायें बंद कर दी हैं और कुछ ने तो बाड़ भी लगा दी है, जिससे मानव तस्कर शरणार्थियों को वहां पहुंचाने के लिए अधिक रकम वसूलने लगे हैं। इस तरह यह समस्या पूरी दुनिया के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।