INSIDE STORY: क्यों चूक गए हम #Rio में, जानिए क्यों Olympics में भारत को मिलते हैं कम मेडल...

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (23 अगस्त) :  रियो ओलंपिक 2016 समाप्त हो चुका है। दो मेडल के साथ भारत को ओलंपिक की मेडल लिस्ट में 67वां स्थान मिला है। 119 खिलाडियों में से 117 खाली हाथ वापस आए हैं। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने जहां 12 से 19 मेडल की उम्मीद जताई थी, वहीं मिले सिर्फ दो मेडल। लेकिन गर्व की बात यह रही कि भारत की बेटियों पीवी सिंधु और साक्षी ने देश का सिर झुकने नहीं दिया। अगर पिछले तीन ओलंपिक में भारत के प्रदर्शन को देखें तो रियो में सबसे कमजोर प्रदर्शन रहा है। सवाल उठता है कि 125 करोड़ से ज्यादा की आबादी वाला हिन्दुस्तान क्यों ओलंपिक में मेडल जीतने के लिए संघर्ष करता दिखाई देता है? क्यों देश को हर चार साल बाद इस स्थिति से गुजरना पड़ता है? क्यों हम अमेरिका, चीन, ब्रिटेन की तरह खिलाड़ी पैदा नहीं कर पा रहे? ऐसे में भारत के स्टार शूटर अभिनव बिंद्रा का पिछले दिनों किया ट्वीट काफी कुछ सोचने को मजबूर करता है। उन्होंने लिखा कि, 'ब्रिटेन के एक मेडल की कीमत है 5.5 मिलियन यूरो डॉलर यानी 48 करोड़ रुपए है।' बिंद्रा ने इस ट्वीट के जरिए भारतीय सिस्टम पर निशाना साधा था। आइए जानते हैं कि चीन, ब्रिटेन और अमेरिका के तुलना में हमारी कितनी तैयारी होती है ओलंपिक के लिए...

रियो ओलिंपिक 2016 के लिए कितनी थी सरकार की तैयारी... - खेल मंत्री विजय गोयल के मुताबिक रियो ओलंपिक के लिए खिलाड़ियों पर सरकार ने काफी पैसा खर्च किया है। - 119 खिलाड़ियों के प्रशिक्षण पर 30 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपये तक खर्च किए गए हैं। - इस बार ओलंपिक में भारत का 119 सदस्यों का अब तक सबसे बड़ा दल हिस्सा ले रहा है। - ओलंपिक इतिहास में भारत केवल 26 मेडल जीतने में सफल रहा है। - बीजिंग ओलंपिक 2008 में भारत ने 1 स्वर्ण और 2 कांस्य पदक के साथ मेडल तालिका में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। - लंदन ओलंपिक 2012 में भारत ने 2 रजत और 4 कांस्य समेत 6 मेडल जीते थे। - लेकिन रियो ओलंपिक 2016 में 1 रजत और 1 कांस्य समेत सिर्फ दो मेडल ही हाथ लगे।

भारत सरकार का खेल बजट ...  - 2016-17 में खेल बजट 1592 करोड़ रुपए है जबकि 2015-16 में 1541 करोड़ रूपये खेलों के लिए आवंटित किए गए थे। - भारत सरकार के खेल मंत्रालय द्वारा 2012 से दिसंबर 2015 के बीच भारतीय खेल संघों को 750 करोड़ रुपये दिए। - खेल मंत्रालय द्वारा यह पैसा खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, कोच और दूसरी सहूलियतों के लिए दिया था।  - इस पैसे का ज्यादातर इस्तेमाल नेशनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट फंड (NSDF) के तहत चलने वाले टार्गेट ओलंपिक पोडियम (TOP) के लिए किया गया।  - देश में 2012-13 में 130 खेल संघ थे जो 2013-14 में 223 हो गए थे लेकिन 2015-16 में घटकर 57 रह गए हैं। - 57 खेल संघों को इस दौरान को खेल मंत्रालय की ओर राशि मिली थी। - स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया को सबसे ज्यादा 146 करोड़ रुपये मिले थे।  - नेशनल राइफल एसोसिएशन को 43 करोड़ रुपये मिले थे।  - रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया को 32 करोड़ रुपये मिले थे। - खेल संघों के अलावा 266 करोड़ रुपये विदेशी कोचों की सैलरी और नेशनल कोचिंग कैम्प में खर्च किए गए।

टार्गेट ओलंपिक पोडियम (TOP)... - टार्गेट ओलंपिक पोडियम TOP स्कीम के तहत अप्रैल 2015 में 97 खिलाड़ियों को सहायता देने की निर्णय लिया था।  - TOP ने इन खिलाडियों के ऊपर 38 करोड़ रुपए खर्च किए। - TOP स्कीम के तहत 97 में से 68 खिलाड़ी रियो ओलिंपिक 2016 के लिए चुने गए। - इस हिसाब से रियो के लिए प्रति खिलाड़ी 9.8 लाख रूपए खर्च किए गए।

नेशनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट फंड (NSDF)... - नेशनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट फंड (NSDF) के तहत 109 खिलाड़ियों को सहायता देने की निर्णय लिया गया।  - NSDF ने इन खिलाडियों के ऊपर 22.7 करोड़ रुपए खर्च किए। - NSDF स्कीम के 109 में से 30 खिलाड़ी ही रियो ओलिंपिक 2016 के लिए चुने गए। - इस हिसाब से रियो के लिए प्रति खिलाड़ी 5.2 लाख रूपए खर्च किए गए।

लंदन ओलंपिक 2012 से रियो ओलिंपिक 2016 की तुलना... - लंदन ओलंपिक 2012 के दौरान भारत ने 142 करोड़ रुपये खर्च करके 6 मेडल जीते थे, जबकि ओलंपिक में भाग लेने वाले खिलाड़ियों की संख्या 83 है।  - यूपीए सरकार ने ऑपरेशन एक्सीलेंस फॉर लंदन ओलिंपिक्स 2012 योजना की शुरूआत की थी।  - इस योजना के तहत खिलाड़ियों तथा एथलीटों के लिए देश में प्रशिक्षण शिविरों पर 61.65 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे।  - विदेशों में प्रशिक्षण पर 70.55 करोड़ रुपए खर्च किए गए, इसके अलावा राष्ट्रीय खेल विकास निधि के तहत 10.32 करोड़ रुपए खर्च किए गए।  - लंदन ओलिंपिक में निशानेबाज विजय कुमार ने रजत, गगन नारंग ने कांस्य, साइना नेहवाल ने कांस्य और मैरीकॉम ने कांस्य पदक जीता था।  - एक रिपोर्ट के मुताबिक रियो ओलंपिक 2016 में हमने 20 करोड़ रुपये कम खर्च किए हैं। - भारत ने रियो ओलंपिक 2016 की तैयारियों पर 122 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।  - रियो ओलंपिक के लिए प्रशिक्षण पर खर्च की जाने वाली कुल राशि 30.075 करोड़ रुपए है।

चीन, ब्रिटेन और अमेरिका कितना खर्च करते हैं खिलाड़ियों पर 

चीन - ओलंपिक के लिए एथलीटों पर चीन ने करीब 4 हजार करोड़ रुपये खर्च कर डाले। - दुनिया के सर्वश्रेष्ठ कोच बुलाए गए इनमें 38 विदेशी कोच शामिल थे। - इस बार ओलंपिक में चीन ने 416 सदस्यों का दल भेजा था। - एक हिसाब के मुताबिक एक गोल्ड मेडल के लिए चीन ने करीब 47 करोड़ खर्च किए। - चीन में 5000 से ज्यादा स्पोर्ट्स स्कूल मौजूदा समय में उपल्ब्ध है।  - चीन में हर कस्बे, हर गाँव, से छांटकर मेधावी खिलाडियों को प्रशिक्षण दिया जाता है।  - 2008 के बीजिंग ओलंपिक में सबसे ज्याद 51 स्वर्ण पदक समेत 100 पदत जीतकर पहले नंबर पर।  - 2012 लंदन में 38 गोल्ड मेडल हासिल कर सिर्फ अमेरिका से पीछे था।  - 1978 के बाद चीन ने अपने स्पोर्ट्स सिस्टम को सुधारा, नतीजा अंतरराष्ट्रीय खेलों में सामने है।  - 1985 में ओलंपिक रणनीति तैयार की गई, जिसके तहत खेल संसाधनों आदि पर फोकस किया गया।  - चीन में आजकल एक स्लोगन ‘च्वी क्वथी च’ बड़ा प्रसिद्ध है।  - इसका मतलब है- खेलों में पूरे देश की शक्ति लगा देना।  - चीन ने ओलंपिक के इतिहास में 201 स्वर्ण पदक समेत 473 पदक जीते हैं। - अमेरिका का सालाना खेल बजट 25 हजार करोड़ रुपये है। - 2015 का खेल बजट जीडीपी का 0.5 फीसदी से अधिक खर्च किया जा रहा है। 

ब्रिटेन - ओलंपिक की तैयारी के लिए अपने एथलीटों पर ब्रिटेन ने 2240 करोड़ रुपये खर्च कर डाले। - इस बार ओलंपिक में ब्रिटेन ने 366 सदस्यों का दल भेजा था। - एक हिसाब के मुताबिक एक गोल्ड मेडल के लिए ब्रिटेन ने करीब 48 करोड़ खर्च किए। - 2008 के बीजिंग ओलंपिक में 19 स्वर्ण पदक समेत 47 पदक जीतकर चौथे नंबर पर रहा। - 2012 लंदन में 29 गोल्ड मेडल हासिल कर सिर्फ तीसरे स्थान पर था।  - ब्रिटेन ने ओलंपिक के इतिहास में 252 स्वर्ण पदक समेत 821 पदक जीते हैं। - ब्रिटेन की कुल आबादी में से 1.8 करोड़ लोग 15 से 35 साल के हैं। - जबकि भारत में 40 करोड़ आबादी इसी ग्रुप की है। - ब्रिटेन का खेलों के लिए सालाना बजट 9 हजार करोड़ रुपए है।

अमेरिका  - अमेरिका में ग्राउंड लेवल से बच्चों को ट्रेनिंग दी जाती है। - अमेरिका में सभी 3.60 करोड़ छात्रों के लिए खेल अनिवार्य किया गया है।  - खेलों के लिए स्कूल और कॉलेजों में सरकार फंड देती है। - लेकिन यूएस ऑलंपिक कमेटी को सरकार से पैसा नहीं मिलता। - यूएस ऑलंपिक कमेटी नॉन प्रोफिट संस्था है। - कमेटी अपना खर्च निजी संस्थाओं उद्योग जगत से लेती है। - खिलाड़ियों के साथ बड़े-बड़े विज्ञापन अनुबंध होते हैं। - कमेटी डोनेशन से भी पैसा इकठ्ठा करती है। - इसके अलावा खिलाड़ी निजी स्तर पर भी प्राइवेट फंड इकट्ठे करते हैं।  - उन्होंने खुद को फंड करने के लिए फंडिंग पोर्टल बना रखे हैं जहां पब्लिक पैसे जमा करती है।  - अमरीका में ओलंपिक कमेटियों की कुल धनराशि का महज 10 फीसदी ही एथलीट्स पर खर्च किया जाता है।  - इस बार ओलंपिक में अमेरिका ने 558 सदस्यों का दल भेजा था। - 2008 के बीजिंग ओलंपिक में 36 स्वर्ण पदक समेत 110 पदक जीतकर दूसरे नंबर पर रहा। - 2012 लंदन में 46 और 2016 में रियो में 46 गोल्ड मेडल जीत कर टॉप पर रहा। - अमेरिका ने ओलंपिक के इतिहास में 1022 स्वर्ण पदक समेत 2520 पदक जीत कर इतिहास रचा है। - अमेरिका का सालाना खेल बजट 24 हजार करोड़ रुपये है।

खिलाड़ियों को कितना इनाम मिलता है...  भारत- भारत सरकार खिलाड़ियों को स्वर्ण पदक जीतने पर 75 लाख, रजत पर 50 लाख व ब्रांज पर 30 लाख देने की घोषणा कर रखी है। इसके अलावा अलग-अलग खेल संस्था और राज्य करोडो़ं रुपए खिलाड़ियों को देने की घोषणा करते हैं। अमेरिका- अमेरिका अपने खिलाड़ियों को स्वर्ण पदक जीतने पर 17 लाख, रजत पर 11 लाख व ब्रांज पर 8 लाख देता है।  चीन- चीन की सरकार अपने खिलाड़ियों को स्वर्ण पदक जीतने पर केवल 21 लाख देती है।  ब्रिटेन- ब्रिटेन में खिलाड़ियों को स्वर्ण पदक जीतने पर केवल पैसा नहीं मिलता।