कारों में रियर सेंसर और कैमरा देना भी हो सकता है अनिवार्य

राहगीरों की सुरक्षा को बढ़ाने और सड़क हादसों में कमी लाने के लिए केंद्र सरकार कुछ और नए कदम उठाने जा रही है। इन कदमों में एयरबैग के अलावा रियर व्यू कैमरा और सेंसर्स को नई कारों में अनिवार्य तौर पर दिए जाने का प्रावधान शामिल हो सकता है। इस कदम से कार के पीछे मौजूद लोगों खासकर बच्चों की सुरक्षा पुख्ता होगी।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के संयुक्त सचिव अभय दामले के मुताबिक जल्द ही इस बारे में नोटिफिकेशन जारी हो सकता है। दामले ने यह जानकारी अगले साल भारत में आयोजित होने वाली वर्ल्ड रोड्स मीट से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान दी।

दामले ने आगे बताया कि वैसे तो सभी कारों में रियर व्यू मिरर लगा आता है, जो कार के पीछे चल रहे वाहनो की जानकारी देता है। लेकिन इन शीशों में सड़क पर नीचे की तरफ यानी ब्लाइंड स्पॉट पर मौजूद कोई चीज़ या व्यक्ति दिखाई नहीं देता।

इन कदमों के अलावा सरकार की योजना कारों में हाई स्पीड ऑडियो वॉर्निंग सिस्टम को भी अनिवार्य करने की है। 80 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा की स्पीड होने पर हल्की बीप-बीप की आवाज़ आनी शुरू होगी और 90 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड होने पर यह आवाज़ तेज़ हो जाएगी।

कारों की जांच और फिटनेस सर्टिफिकेट से जुड़ी प्रक्रिया भी एक अक्टूबर 2018 से ऑटोमैटेड हो जाएगी। इन में किसी तरह के मानवीय हस्तक्षेप की जरूरत नहीं होगी। ऐसे ही ड्राइविंग लाइसेंस के लिए टेस्ट की प्रक्रिया भी ऑटोमैटेड हो जाएगी।

एक्सीडेंट के दौरान मदद करने वाले नहीं होंगे परेशान

सड़क हादसों में कई दफा राह चलते लोग चाहकर भी घायलों की मदद नहीं कर पाते हैं। इसकी बड़ी वजह कानून पचड़ों से बचना होता है। सड़क दुर्घटना में घायलों की मदद करने वाले व्यक्ति को अक्सर ही कानूनी पेचीदगियों से जूझना पड़ता है। इस स्थिति को देखते हुए सरकार कानून में संशोधन करेगी। ऐसे मौकों पर मदद करने वाले लोगों को कानूनी सरंक्षण दिया जाएगा, उनके बयान एक ही बार रिकॉर्ड हो जाएंगे। दोबारा जरुरत पड़ने पर संबंधित विभाग का कर्मचारी मदद करने वाले के घर या दफ्तर में जाकर बयान ले पाएगा।   

कारदेखो

कारों में रियर सेंसर और कैमरा देना भी हो सकता है अनिवार्य