टीवी शो जाल में देखिए साइबर बुलीइंग और साइबर शेमिंग का एक बड़ा उदाहरण

नई दिल्ली (25 मई): साइबर बुलीइंग और साइबर शेमिंग का एक और उदहारण है ' सुसाइड गेम' जिसकी शुरुआत कहते हैं 2016 में रूस से हुयी थी। 2016 में फिलिप बुडिकिं नामक रूसी मनोविज्ञान का विद्यार्थी हिरासत में ले लिया गया। जिसने ये कहा की उसने 'ब्लू व्हेल चैलेंज' नाम के ऑनलाइन गेम को इसलिए बनाया क्यूंकि वो समाज से कमज़ोर और बिना अहमियत के बच्चों को जड़ से मिटा देना चाहता है।

कहा जाता है कि उसके बनाये  गेम से 2016 में 13 बच्चों ने ख़ुदकुशी कर ली थी। आपको बता दें कि इस गेम में 50 के करीब खेल सम्बन्धी चुनातियाँ दी जाती हैं। जो शुरुआत में साधारण होती हैं जैसे- डरावनी फिल्में देखना, तस्वीरें बनाना इत्यादि, और धीरे -धीरे वो चुनौतियां खतरनाक शक्ल लेती हैं। और फिर इसके बाद बच्चों को डरा धमका कर ख़ुदकुशी करने पर मजबूर करने का सिलसिला शुरु किया जाता है। आपको बता दें कि गेम के एप्प पर बच्चों की सभी जानकारी सेव हो जाती है जिससे एडमिनिस्ट्रेटर्स के लिए बच्चों को धमकाना आसान हो जाता है।

कई रिसर्चर और मनोविज्ञानिक विशेषज्ञों का मानना है की ऐसे खेल बनाये ही जाते हैं, बच्चों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए, और जो बच्चे मासूम और अकेले होते हैं, वो इन चुनौतियों को स्वीकार करते हैं और समाज और अपने सहकर्मियों के बीच स्वीकृति, इज़्ज़त और महत्त्व पाने के लिए खुद को तकलीफ देकर हर चुनौती को जीतना चाहते हैं। जोखिम उठाना, हिम्मत दिखाना और अपने आत्म विश्वास को मज़बूत करने की बच्चों की कोशिश ही इस तरह के ऑनलाइन सुसाइड गेम्स को बढ़ावा देती है।आज भले ही ब्लू व्हेल गेम की पूरी पुष्टि नहीं हुयी है, मगर ऐसे बहुत सारे गेम जैसे चोकिंग गेम, साल्ट & आइस चैलेंज , फायर चैलेंज, कटिंग चैलेंज,ह्यूमन एम्ब्रायडरी, फायर चैलेंज ऑनलाइन शुरू हो गए जिसमे कई हिंदुस्तान के बच्चे भी शामिल होने लगे। इसे पुरे प्रकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया। अदालत ने अपने नोटिस में कहा कि इस प्रकार के ऑनलाइन गेम को बैन कर दिया जाए।