नाले में NCR? जानिए ट्रैफिक महाजाम की REAL STORY

डॉ. संदीप कोहली, नई दिल्ली (30 जुलाई): दिल्ली कहने को तो देश की राजधानी है। लेकिन थोड़ी देर की बारिश से सड़कें नदियों में तब्दील हो जाती है। यही हाल पूरे एनसीआर का है। बारिश की वजह से दिल्ली एनसीआर के अधिकतर इलाके जलभराव की समस्या आम है और फिर ट्रैफिक जाम से लोग होते हैं परेशान। सालों से चली आ रही यह समस्या आज तक अपने समाधान तक नहीं पहुंच पाई है। कारण जल निकासी की सही व्यवस्था  का ना होना। दिल्ली का 100 साल पुराना ड्रेनेज सिस्टम ध्वस्त हो चुका है। नालों, तालाबों के ऊपर अतिक्रमण हो चुका है। और जो नाले बचे हैं वो बरसात के पानी को निकाल पाने में सक्षम नहीं हैं। नतीजा गुड़गांव के रूप में आपके सामने है। क्या है समस्या की असल वजह, आईए जानते हैं...  ड्रेनेज सिस्टम नाम की कोई व्यवस्था नहीं- दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए),  गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) के टाउन प्लानर कहते हैं कि दिल्ली  एनसीआर में ड्रेनेज सिस्टम नाम की कोई व्यवस्था नहीं रह गई है। वर्षा जल संचयन की ठोस व्यवस्था नहीं है। नाले और सीवर आपस में मिल चुके हैं। शहर में ठोस कचरा प्रबंधन बहुत खराब है। दिल्ली में 22 बड़े नाले हैं। उन नालों में कचरा गिराया जाता है। इसी तरह  गुड़गांव में तीन और गाजियाबाद में 4 बड़े नाले हैं जिसमें सीवरेज का पानी भी बिना शोधित किए उन नालों में गिर रहा है। जबकि नालों की क्षमता भी सीमित है। सड़कों की डिजाइन में भारी खामी- इसके अलावा सड़कों की डिजाइन में भी खामी है। हर दो-तीन साल पर सड़कों का निर्माण किया जाता है। निर्माण से पहले सड़क की पुरानी परत हटाई नहीं जाती, बल्कि उसके ऊपर कंक्रीट व कोलतार की एक नई परत चढ़ा दी जाती है। इसके चलते कई इलाकों में भवन से सड़कें ऊंची हो गई हैं। उदाहरण के लिए आइटीओ पर ही आयकर विभाग के पास सड़क ऊंची है। ड्रेनेज सिस्टम 100 साल पुराना- दिल्ली का ड्रेनेज सिस्टम 100 साल पुराना है। इतने वर्षो में अनियोजित विकास के चलते सैकड़ों अवैध कॉलोनियां बस गई। शहर का तेजी से फैलाव होता चला गया। उसके मुताबिक ड्रेनेज व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए विस्तृत योजना नहीं बनी। जो पुराने नाले हैं उन पर निर्माण भी हो गया। ऐसे में उनकी सफाई मुश्किल है। सारे विभाग फेल- इन समस्याओं के लिए बहुत हद तक दिल्ली की बहुविभागीय प्रणाली भी जिम्मेदार है। नगर निगम, नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी), छावनी परिषद लोक निर्माण विभाग, सिंचाई व बाढ़ नियंत्रण विभाग व डीडीए के बीच नालों के विकास व सफाई के लिए आपसी सहमती नहीं बन पाती। सभी विभाग अपने-अपने स्तर से काम करते हैं। मास्टर प्लान 2021 किया जा रहा है तैयार- डीडीए जब मास्टर प्लान 2021 तैयार कर रहा था तब सभी विभागों से योजना बनाकर देने के लिए कहा गया था। सिंचाई व बाढ़ नियंत्रण विभाग से भी कहा गया था कि वो अपनी योजना बनाकर दे, लेकिन किसी विभाग ने अपनी योजना बनाकर नहीं दी। इसलिए जरूरी है कि सभी विभागों में सामंजस्य बनाकर दिल्ली सरकार या केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय में से किसी एक की जिम्मेदारी तय की जाए। दिल्ली में ड्रेनेज सिस्टम... क्यों होता है फेल - साल 2016-17 में दिल्ली सरकार का बजट 46,600 करोड़ है... MCD को दिल्ली सरकार ने दिए 6,919 crore रूपए - दिल्ली सरकार 60 फुट से चौड़ी सड़कों की मरम्मत तथा उनके किनारे स्थित नालों की सफाई के लिए 1800 करोड़ रुपये देती है। - वहीं साउथ दिल्ली निगम के अंतर्गत आने वाली 5000km की सड़कों के लिए मात्र 130 करोड़ रुपये आवंटित करती है. - दिल्ली की 29,931 किमी रोड की सफाई की जिम्मेदारी तीनों निगमों के 62 हजार कर्मचारियों की है. - तीनों निगम सड़कों और नालियों की सफाई के लिए 500 करोड़ रूपए खर्च किए जाते हैं. - इसके अलावा 1200 किमी की रोड की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार के पीडब्ल्यू विभाग की है. - पीडब्ल्यू विभाग सड़कों और नालियों की सफाई के लिए 200 करोड़ रूपए खर्च करता है. - पिछले साल उत्तरी और पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने 46 हजार मैट्रिक टन गाद नालों से निकाला था. - अकेले दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने 31 हजार मैट्रिक टन गाद नालों से निकाला. - दिल्ली सरकार के पीडब्ल्यूडी डिपार्टमेंट ने पानी निकासी लिए 500 नए पंप लगाए हैं. - दिल्ली के ड्रेनेज मास्टर प्लान में 1981 के बाद से कोई बदलाव नहीं हुआ है, जिसे दिसंबर 2013 में पूरा हो जाना चाहिए था, आज कर अधर में लटका है. - सिवेज मास्टर प्लान जो दिल्ली जल बोर्ड ने 1998 में बनाया, जिसे दिसंबर 2013 में पूरा हो जाना चाहिए था, आज कर अधर में लटका है. - एनजीटी द्वारा किए गए सर्वे में पाया गया कि 1976 के बाद से 201 नालों में से 44 नालों पर अवैध निर्माण हो चुका है। - दिल्ली में 157 ऐसी सड़को को चिन्हित किया गया है जिसमें पानी भरने की ज्यादा संभावना रहती है. - पानी निकासी के लिए तीनों निगमों के अलावा दिल्ली सरकार के पीडब्ल्यूडी और एनडीएमसी की जिम्मेदार हैं. गुरुग्राम का ड्रेनेज सिस्टम... क्यों हुआ फेल - हरियाणा सरकार के तीन नाले (बजघेरा, धरमपुर और बादशाहपुर) से गुड़गांव के गंदे पानी की निकासी की जाती है। - सोहना रोड के साथ-साथ बादशाह पुर नाला गुज़रता है, इस नाले के ज़रिये ही गुरुग्राम का पानी हीरो हौंडा चौक से होते हुए नज़फगढ़ ड्रेन में जाता था। - नजफगढ़ नाले में पानी का बहाव खुला है, लेकिन ये तीनों नाले निर्माणाधीन हैं जो आरसीसी से ढका जा रहा है। - ऊपर से इस ड्रेन के ऊपर हाईवे बना दिया गया और इसके स्वाभाविक प्रवाह को बंद कर दिया गया। - दूसरी तरफ नालों का पानी छोटी कच्ची नालियों में मोड़ा गया, यहां तक कि कुछ जगह सिर्फ एक पाइप से पानी को दूसरी जगह गिराया जा रहा है। - बड़े नालों में दिए गए डायवर्जन (पानी मोड़ना) की क्षमता कम थी जिसकी वजह से गुड़गांव और एनएच-8 पर जलभराव हुआ। - इसका नतीजा यह हुआ कि पहले जयपुर हाईवे ब्लॉक हो गया, कई चार फुट तो कहीं छह फुट पानी भर गया। - इससे कई गाड़ियां डूब गईं, उसके बाद महरौली रोड ब्लॉक हो गया, जितने भी सेक्टर रोड हैं गुरुग्राम के वो सारे ब्लॅक होते चले गए। - हालत यह हो गई कि रात को बोर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) को बुलाया गया, फिर भी सड़क खुल नहीं पाई। - न्यू गुरुग्राम की 100 के करीब रेज़िडेंट वेलफेयर एसोसिएशन की एक शीर्ष संस्था है गुड़गांव सिटीजन काउंसिल है. - गुड़गांव सिटीजन काउंसिल के मुताबिक यहां पर बुनियादी ढांचा बनाने का काम हरियाणा डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी हुडा का है. - हरियाणा डेवलपमेंट अथॉरिटी मास्टर रोड, मास्टर सिवेज, मास्टर ड्रेनज, वाटर सप्लाई बनाने का काम करती है. - हाउसिंग सोसायटी के भीतर का ढांचा, सड़क से लेकर सीवेज तक बिल्डर के जिम्मे आया. - एक तरह से सरकार के जिम्मे बाहरी सड़क या नाले वगरैह बनाने के ही काम है. - रेज़िडेंट वेलफेयर एसोसिएशन की तरफ से बाहरी विकास के नाम पर 17,000 करोड़ रुपये हुडा को दिये गए हैं. - गुड़गांव में 2008 में नगर निगम की स्थापना हुई लेकिन नगर निगम को 2013 तक कोई अधिकार नहीं दिया गया. - गुरुग्राम में 35 वार्ड हैं, प्रति वार्ड करीब 25-30 सफाई कर्मचारी या निगम कर्मचारी हैं, शहर की ज़रूरत के हिसाब से यह संख्या पर्याप्त नहीं है। - निगम का प्रस्ताविक बजट 1600 करोड़ का है लेकिन उन्हें मिलता 400 करोड़ है।