अब रूस और अमेरिका के बीच होगा स्पेस वार !

नई दिल्ली (16 अप्रैल): मध्‍य-पूर्व का देश सीरिया इन दिनों जंग का अड्डा बन गया है। पिछले करीब सात-आठ साल से युद्ध की आग में झुलस रहे इस देश में मानवीय संकट भी मुंह बाए खड़ा है, जहां अब तक करीब पांच लाख लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 50 लाख से अधिक की आबादी विस्‍थापन झेलने को मजबूर हो गई। अब सीरिया, रूस और अमेरिका के बीच एक नए किस्म के तनाव का केंद्र भी बन गया है, जिसे संयुक्त राष्ट्र ने 'शीतयुद्ध का नया दौर' करार दिया है। रूस और अमेरिका ही नहीं, सीरिया के मुद्दे पर उसके पड़ोसी देशों और ब्रिटेन, फ्रांस की भी नजर है।

इन देशों की ओर से सीरिया पर 103 मिसाइलें दागी गईं, जिनमें से सीरिया ने 71 मिसाइलों को सफलतापूर्वक मार गिराया। रूस ने यह दावा किया है। रूसी मिलिटरी ने दावा किया है कि अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन की तरफ से जो मिसाइलें दागीं गईं उनमें से 71 को सीरिया ने एयर डिफेंस सिस्टम के जरिए गिरा दिया और मिसाइल हमले से ज्यादा नुकसान भी नहीं हुआ है। 

सीरिया को अमेरिका और उसके सहयोगियों के हमले से बचाने के लिए रूस ने 18 महीने पहले ही योजना बना ली थी। इस वजह से अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन के हमले से सीरिया को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। इन देशों की ओर से सीरिया पर 103 मिसाइलें दागी गईं, जिनमें से सीरिया ने 71 मिसाइलों को मार गिराया। सीरिया पर हमले के बाद दुनिया दो खेमों में बंटती दिख रही है। रूस और अमेरिका के बीच मानों जैसे तलवारें खिंच चुकी हैं।

इस बीच आशंका जताई जा रही है कि दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष में जंग उनका पहला कदम हो सकता है। इससे पहले 2007 और 2008 में सेटेलाइट हैकिंग के कई मामले सामने आए, लेकिन उनमें ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। लेकिन अगर नुकसान करने की मंशा हो तो फायर थ्रस्टर्स को चालू करके सेटेलाइट को कक्षा में घूमने पर विवश किया जा सकता है। यूरोपीय स्पेस एजेंसी क्वांटम इनक्रिप्शन तकनीक पर काम कर रही है जो उसके सेटेलाइटों को हैक होने से बचाएगा।

अमेरिका, रूस और चीन अपनी ऐसी क्षमता का प्रदर्शन कर चुके हैं। जिसके तहत अंतरिक्ष में मौजूद किसी सेटेलाइट को धरती से मिसाइल दागकर तबाह किया गया। अमेरिका ने तो किसी यान को मार गिराने की रिसर्च तभी शुरू कर दी थी जब रूसियों ने 1957 में अपना पहला सेटेलाइट स्पुतनिक 1 अंतरिक्ष में भेजा था। रूस भी कहां पीछे रहने वाला था।

साफ है कि गृहयुद्ध से जूझ रहे सीरिया में विभिन्‍न देशों के अपने-अपने हित हैं। अमेरिका अपने दबदबे में किसी तरह की कमी नहीं आने देना चाहता तो रूस भी खुद को एक बार‍ फिर से बड़ी शक्ति के रूप में स्थापित करने में लगा है। यहां ईरान, सऊदी अरब और इजरायल के भी अपने-अपने हित हैं। सीरिया में राष्‍ट्रपति बशर अल-असद की सरकार है, जिसे अमेरिका सत्‍ता से बेदखल करना चाहता है, लेकिन रूस मजबूती के साथ असद सरकार के साथ खड़ा है। सीरिया के विद्रोही बहुल डूमा इलाके में विगत दिनों हुए कथित रासायनिक हमले के बाद अमेरिकी मिसाइलों के हमले ने दुनियाभर में एक नए किस्म का तनाव पैदा कर कर दिया है। रूस ने भी अपने नागरिकों से कहा है कि वे तीसरे विश्वयुद्ध के लिए तैयार रहें।