जानिए, कैसी है इमरान हाशमी की फिल्म 'अज़हर'

नई दिल्ली (13 मई): इमरान हाशमी, प्राची देसाई और नरगिस फाखरी अभिनीत फिल्म अजहर शुक्रवार को रिलीज हो गई। इस फिल्म का दर्शक काफी दिनों से इंतजार कर रहे थे। पहले ऐसा कहा जा रहा था कि यह फिल्म पूर्व क्रिकेटर अजहरुद्दीन के जीवन पर आधारित है। लेकिन फिल्म देखकर लगता है कि इसमें उनकी जिंदगी के कुछ ही हिस्सों का इस्तेमाल किया गया है। एक पक्ष पर केंद्रित यह फिल्म पूरी तरह से उनकी बायोपिक नहीं लगती। चलिए, आपको बताते हैं आखिर कैसी है इमरान की फिल्म अजहर। 

तो कहानी है हैदराबाद के रहने वाले मोहम्मद अजहरुद्दीन (हाशमी) की। अजहरुद्दीन बचपन से ही क्रिकेट का शौकीन रहा है। बॉलिवुड की कई दूसरी फिल्मों की तरह इस फिल्म में भी अजहर की जिंदगी में क्रिकेट टीम में सेलेक्शन के साथ पत्नी बनकर आती है- नौरीन (प्राची देसाई)। लेकिन, उतार चढ़ाव के बीच कुछ सालों के बाद उसकी दूसरी शादी होती है- एक्ट्रेस संगीता (नरगिस फाकरी) से। खेल में अजहर काफी पैसा कमाता है। लेकिन इस नाम और पैसा कमाने के साथ ही शुरू होता है एक और खेल।

इसी खेल में अजहर का नाम मैच फिक्सिंग में फंस जाता है। इसके बाद से उसकी पॉपुलैरिटी को एक बड़ा झटका लगता है। फिल्म के केंद्र में फिक्सिंग के मामले को ही रखा गया है। इसके लिए अजहरुद्दीन पर कोर्ट केस और इन्हीं तरह की सभी घटनाओं को फिल्म के माध्यम से दर्शाने की कोशिश की गई है। 

पूरी फिल्म अजहरुद्दीन के जीवन के इसी पक्ष पर फोकस रख कर तैयार की गई है। तीन चौथाई फिल्म में बताया गया कि अज़हर पर तीन मैचों के फिक्सिंग के आरोप लगे जिसमें उनका प्रदर्शन भी कमजोर रहा था। इस कारण उनके खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इसके बाद अज़हर इस ‍फैसले के खिलाफ अदालत में जाता हैं और आखिर में उसकी जीत होती हैं। 

बॉलिवुड की कई फिल्मों की तरह इसमें भी काफी लंबे कोर्टरूम ड्रामा सीन्स को शामिल किया गया है। जो काफी कॉमन लगता है, दर्शक पुरानी फिल्मों के इसी तरह के दृश्यों को याद कर थोड़ा बोर भी हो जाते हैं। हालांकि, फिल्म के संवाद औसत हैं। स्पोर्ट्स पर आधारित दूसरी मैरीकॉम जैसी हाईप्रोफाइल और चक दे इंडिया जैसी फिल्मों के सामने कमतर लगते हैं। फिल्हाल कहानी का ट्रीटमेंट औसत ही है।

कुछ दर्शकों की राय है कि इस फिल्म से भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन की जिंदगी की घटनाओं पर आधारित यह फिल्म उनकी छवि सुधारने के लिए बनाई गई है। हालांकि, फिल्म से पहले दर्शकों से साफ कहा गया है कि अजहर के अलावा यहां सब काल्पनिक है। 

एक्टिंग की बात की जाए तो नरगिस फाखरी और प्राची देसाई ने अपने किरदारों में अच्छा काम किया है। इमरान की बात की जाए तो उनके फैन्स को उनकी एक्टिंग पसंद आ सकती है। लारा दत्ता ने भी काफी दिनों बाद किसी फिल्म में आकर अच्छा काम किया है। दर्शक उनकी मौजूदगी को नोटिस करता है। हालांकि, कुणाल रॉय कपूर वकील के रूप में बिल्कुल नेचुरल नहीं लगते। म्यूजिक फिल्म की जान बना रहता है। रिलीज से पहले ही हिट हो चुका म्यूजिक इमरान की हर फिल्म की तरह लोगों को पसंद आता है। निर्देशन के तौर पर एंथनी डिसूजा और भी बेहतर काम कर सकते थे।