कहीं आपने भी तो इस स्कीम में नहीं लगाया है पैसा, RBI कर रही है जांच

नई दिल्ली (13 नवंबर): इस समय मोदी सरकार के निशाने पर ब्लैक मनी को तरह-तरह की स्कीम के जरिए खपाने वाले हैं। इसी कड़ी में आरबीआई लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) के तहत होने वाली डीलिंग्स की जांच कर रहा है।

एलआरएस के तहत भारतीयों को विदेश में सालभर में ढाई लाख डॉलर तक निवेश करने की इजाजत है। आरबीआई को शक है कि इस सुविधा का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग में किया गया है। कई लोगों से एलआरएस के तहत विदेश में बनाई गईं अनलिस्टेड कंपनियों में हुए ट्रांजैक्शंस के बारे में सवाल किए गए हैं। ये सवाल इन कंपनियों को दिए गए लोन, विदेश में खरीदी गई प्रॉपर्टी और ऐसी कंपनियों से भारत लाई गई रकम के बारे में पूछे गए हैं।

कुछ मल्टिनेशनल बैंक अपने कस्टमर्स से यह हलफनामा मांगने लगे हैं कि एलआरएस के तहत विदेश में खोले गए फॉरेन करंसी अकाउंट में जमा की गई रकम का उपयोग विदेश में दूसरे निवेशों में नहीं किया जाएगा। एलआरएस को फरवरी 2004 में शुरू किया गया था। जिसका मकसद था अमीर लोगों को अपनी सेविंग्स को विदेश में निवेश करने का मौका देना। हालांकि कुछ लोगों ने इसका दुरुपयोग किया है।