नोटबंदी पर चिदंबरम के सवाल, जेटली ने कहा, उन्हें नोटबंदी की समझ नहीं

नई दिल्ली ( 30 अगस्त ): रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बुधवार को अपनी सालाना रिपोर्ट पेश की। इसमें बताया गया कि नोटबंदी के बाद बैंकों के पास 1000 रुपये की 8 करोड़ 90 लाख प्रतिबंधित नोट वापस नहीं आए। आरबीआई के मुताबिक पिछले साल नवंबर में लागू की गई नोटबंदी के दौरान देश में प्रचलन में रहे 15.44 लाख करोड़ रुपये के प्रतिबंधित नोट में से 15.28 लाख करोड़ रुपये बैंकिंग सिस्टम में वापस लौट कर आ गए हैं। 

इस पर कांग्रेस समेत विपक्ष ने नोटबंदी को फेल बताते हुए सरकार पर हमला बोला। इसके बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सरकार का पक्ष रखा और नोटबंदी के कई फायदे गिना इसे सफल बताया। जेटली ने कहा कि टैक्स बेस बढ़ाने से लेकर टेरर फंडिंग रोकने तक, नोटबंदी हर मोर्चे पर सफल रही। 

जेटली ने कहा कि कि नोटबंदी का उद्देश्य कैश लेन-देन कम करना था। नकदी का आदान-प्रदान 17 प्रतिशत कम हो गया है। नोटबंदी का प्रभाव सही रास्ते पर है और भविष्य में केंद्र जो भा कदम उठाएगा, उसका आधार उस पर आधारित होगा। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार का अगला कदम चुनाव में कालेधन पर रोक लगाना है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि लंबी अवधि में ग्रोथ को फायदा होगा। जेटली ने पी चिदंबरम पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें नोटबंदी की समझ नहीं।

इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने ट्वीट कर कहा कि नोटबंदी में चलन से बाहर किए गए 15,44,000 करोड़ रुपये के नोट में से 16,000 करोड़ रुपये के नोट वापस नहीं आए। ये करीब एक फीसदी है। ऐसे में आरबीआई को शर्म आनी चाहिए जिसने नोटबंदी की अनुशंसा की।

पी. चिदंबरम ने अगले ट्वीट में कहा कि नोटबंदी के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने 16,000 करोड़ हासिल किए, लेकिन 21,000 करोड़ रुपये नए नोट छपवाने में खर्च किए। ऐसे अर्थशास्त्री नोबल पुरस्कार के योग्य हैं। पी. चिदंबरम ने आगे कहा कि 99 फीसदी नोट कानूनी तौर पर बदले गए! क्या नोटबंदी ऐसी योजना थी जिसके जरिए काले धन को सफेद में बदलने की योजना बनाई गई थी?