12 लोगों पर बैंकों का बकाया है 2 लाख करोड़

नई दिल्ली (14 जून): रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया RBI ने बैंके के फंसे कर्जों को निकालने की प्रक्रिया तेज कर दी है। RBI 12 ऐसे बैंक खातों की पहचान की है जिन पर 8 लाख करोड़ के कुल NPA का तकरीबन 25 फीसदी यानी 2 लाख करोड़ रुपये का कर्ज फंसा हुआ है। इन खातों पर 5 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज है। रिजर्व बैंक ऐसे खातों को लेकर बैंकों को दिवाला प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश देने जा रहा है। इन मामलों को एनसीएलटी में भी प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।

गौरतलब है कि बैंकों का NPA यानी नॉन परफोर्मिंग एसेट्स 8 लाख करोड़ रुपये का है जिनमें से 6 लाख करोड़ सरकारी बैंकों का है। ये कर्ज लंबे समय से फंसा हुआ है और रिकवरी नहीं हो पा रही है। बढ़ते NPA से बैंकों की हालत खस्ता है और इस कर्ज की वसूली के लिए अब खुद रिजर्व बैंक सक्रिय हो गया है। हालांकि रिजर्व बैंक ने उन 12 खाताधारकों के नाम नहीं बताए हैं जिनपर बैंकों का सबसे ज्यादा पैसा बकाया है लेकिन कहा है कि इन कर्जदारों से पैसा वसूलने के लिए दिवालियापन प्रक्रिया शुरू करने को कहा जाएगा।

इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक NPA की परिभाषा में ही कुछ राहत देने पर विचार कर रहा है। उसकी NPA वर्गीकरण की अवधि को 90 दिन से आगे बढ़ाने की योजना है. इससे लघु एवं मध्यम उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद है।

मौजूदा व्यवस्था के तहत कोई भी कर्ज का खाता उस समय NPA में परिवर्तित हो जाता है जब उसकी किस्त और ब्याज का भुगतान 90 दिन तक नहीं किया जाता है। जहां तक सूक्ष्म और लघु इकाइयों की बात है उन्हें माल के बदले भुगतान कई बार देरी से मिलता है। ऐसे में जैसे ही वह बैंकों से लिये कर्ज के भुगतान में 90 दिन से अधिक देरी करते हैं उनका कर्ज NPA श्रेणी में चला जाता है और फिर उन्हें आगे कर्ज नहीं मिलता है।