मुंबई में RBI बोर्ड की बैठक जारी, राहुल गांधी बोले- उम्मीद है उर्जित पटेल और उनकी टीम नहीं झुकेगी


न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (19 नवंबर): 
केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के बीच जारी तनाव के बीच इस समय मुबई में आरबीआई बोर्ड की अहम बैठक हो रही है। आरबीआई बोर्ड की इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है। इस बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होनी है. माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद सरकार और आरबीआई के बीच जारी खींचतान पर विराम लग सकता है। सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में दोनों पक्ष कुछ मुद्दों पर आपसी सहमति पर पहुंचने के पक्ष में है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार और रिजर्व बैंक बैंकों में त्वरित सुधारात्मक उपायों (पीसीए) की रूपरेखा तथा एमएसएमई क्षेत्र को ऋण देने के प्रावधानों में ढील को लेकर आपसी सहमति से किसी समाधान पर पहुंचने की भी संभावना है।  इसके अलावा एनबीएफसी के लिए स्पेशल विंडो का मुद्दा भी इस बैठक का हिस्सा बन सकता है।


इन सबके बीच कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर पीएम मोदी पर देश की संस्थाओं को बर्बाद करने का आरोप लगाया और उम्मीद जताई कि आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल एवं उनकी टीम नहीं झुकेगी। राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में लिखा है कि, 'मोदी जी और सांठगांठ वाले पूंजीपतियों का उनका गुट लगातार हर उस संस्था को नष्ट कर रहा है जो उनके उनके नियंत्रण में आ सकती है। आज आरबीआई बोर्ड की बैठक में अपनी कठपुतली बने लोगों के जरिये वह आरबीआई को तबाह करने का प्रयास करेंगे। मैं आशा करता हूं कि (उर्जित) पटेल और उनकी टीम मजबूत है और वे उन्हें (मोदी) उनकी जगह दिखा देंगे।'


इससे पहले कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार का, रिजर्व बैंक के भंडार को हथियाने के लिए उस पर कब्जा करने का इरादा है। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक के पास 9.59 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम कोष है। आरोप लग रहे हैं कि सरकार इस कोष का एक हिस्सा लेना चाहती है। इसके अलावा दूसरे कई मसलों पर भी टकराव की स्थिति के दावे राजनीतिक गलियारों व अर्थजगत में किये जा रहे हैं।

आपको बता दें कि पिछले कई दिनों से विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार और आरबीआई बैंक के बीच टकराव जारी है। सरकार अर्थव्यवस्था के पिछड़ने का हवाला देकर अपनी मांगें मनवाना चाहती है, तो आरबीआई का कहना है कि अगर वह सरकार की मांगों को मान लेता है, तो इससे बैंकिंग प्रणाली ध्वस्त हो जाएगी। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने साफ शब्दों में सरकार को चेता दिया था कि अगर उसने संस्थान की स्वायत्तता को ठेस पहुंचाई  तो बाजार को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।