अब बढ़ सकती हैं धोनी की परेशानी!

नई दिल्ली (13 जुलाई): शास्त्री की ताजपोशी ने धोनी की टेंशन बढ़ा दी है। धोनी जब कप्तान थे तब भी रवि शास्त्री से उनका रिश्ता ठीक नहीं था। अब धोनी कप्तान नहीं हैं और रवि शास्त्री विराट के बॉस हैं। ऐसे में क्या पुरानी लड़ाई फिर एक बार नई करवट लेगी। साल 2007 में जब धोनी टी 20 टीम के कप्तान बने और अपने पहले ही टूर्नामेंट में खिताब जीत कर अपना लोहा मनवाया था, लेकिन शास्त्री की नजर में वह इतने काबिल नहीं थे कि उनपर विश्वास किया जा सके।


खिताब जीतने के बाद धोनी ने मैदान पर ही शास्त्री को अपने अंदाज में जवाब दिया था। साल 2014 में रवि शास्त्री को टीम इंडिया का डायरेक्टर उस समय बनाया गया था जब इंग्लैंड दौरे पर धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया लगातार हार रही थी। धोनी रवि शास्त्री के पक्ष में नहीं थे, लेकिन लगातार हार ने धोनी को बैकफुट पर ला दिया। सिर्फ 2014 ही क्यों 2015 में जब टीम इंडिया को धोनी की कप्तानी में बांग्लादेश के खिलाफ पहली बार कोई सीरीज गंवानी पड़ी तो उस समय भी धोनी ने रवि शास्त्री पर निशाना साधा था।


2016 टी 20 वर्ल्ड कप के बाद जब रवि शास्त्री का कार्यकाल खत्म हो गया था तो धोनी ने रवि शास्त्री पर बयान देते हुए कहा था कि सिर्फ पद भरने के लिए किसी को भी कोच बनाना सही नहीं है। साफ है कि कप्तान विराट कोहली और रवि शास्त्री एक दूसरे की पहली पसंद हैं जबकि धोनी और रवि शास्त्री के बीच हमेशा से टशल देखने को मिला है। धोनी 2019 का वर्ल्ड कप खेलना चाहते हैं। रवि शास्त्री की कोचिंग में विराट कोहली को 2019 वर्ल्ड कप के लिए टीम तैयार करना है।


धोनी वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज में 5 मैचों से 32 की एवरेज से सिर्फ 161 रन बना सके। इससे पहले चैम्पियंस ट्रॉफी के 5 मैचों में भी धोनी केवल 67 रन बना पाए। धोनी को फाइनल के साथ 2 मैच में बैटिंग का मौका मिला था। फाइनल में धोनी पूरी तरह से नाकाम रहे, जिसके बाद लगातार धोनी पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में नए कोच रवि शास्त्री के साथ धोनी जैसे सीनियर खिलाड़ी कितना तालमेल बिठा पाते हैं ये तो वक्त ही बताएगा।