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मेडिकल डिवाइस हो सकते हैं सस्ते

केंद्र सरकार करीब मेडिकल डिवाइसों की कीमत नियंत्रित करने की योजना बना रही है। मेडिकल डिवाइसों पर सरकार पहले 30 प्रतिशत मार्जिन तय करने पर विचार कर रही है। सरकार के इस कदम से मेडिकल डिवाइस सस्ते हो सकते हैं।

न्यूज24 ब्यूरो, नई दिल्ली ( 15 जून ): मोदी सरकार आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली मेडिकल डिवाइसेज की कीमतों को नियंत्रित करने की योजना बना रही है। सरकार इन डिवाइसेज के ट्रेड मार्जिन को 30 पर्सेंट तक सीमित करने की तैयारी कर रही है। इससे डिस्ट्रिब्यूटर्स, होलसेलर्स, रिटेलर्स और अस्पतालों की ओर से मरीजों से अधिक वसूली किए जाने पर लगाम लग सकती है।नीति आयोग ने यह सुझाव दिया है ताकि मेडिकल डिवाइसेज और सर्विसेज को अफोर्डेबल किया जा सकेगा। आयोग ने सुझाव दिया है कि इन डिवाइसेज के ट्रेड मार्जिन को तार्किक स्तर पर लाने को लेकर विचार करना चाहिए। इसी के तहत पहले पॉइंट ऑफ सेल पर इन डिवाइसेज को 30 फीसदी मार्जिन तक लाने का सुझाव है।हाल ही में पीएमओ के साथ हुई मीटिंग में इस प्रस्ताव पर चर्चा की गई। नीति आयोग ने इस मसले को लेकर मेडिकल डिवाइसेज मैन्युफैक्चरर्स और पब्लिक हेल्थ ग्रुप्स के अलावा सभी संबंधित पक्षों से बातचीत करनी शुरू कर दी है। नीति आयोग ने अफोर्डेबल मेडिसिन्स और हेल्थ प्रॉडक्ट्स की स्टैंडिंग कमिटी से कहा है कि उसे एक ऐसी मेडिकल डिवाइसेज की लिस्ट तैयार करनी चाहिए, जो जिससे मार्जिन को सीमित किया जा सके और अधिक मात्रा में उत्पादन हो सके।

मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री फिलहाल करीब 10 अरब डालर की है। अगले कुछ वषरें में इसके बढ़कर 20 अरब डालर होने का अनुमान है। मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री में मेडिकल डिस्पोजेबल्स एंड कंज्यूमेबल्स, मेडिकल उपकरण और इंप्लांट्स जैसी चीजें आती हैं।भारत अपनी जरूरत की 75 प्रतिशत से अधिक मेडिकल डिवाइस आयात करता है। सरकार को मेडिकल डिवाइस की कीमत पर अंकुश लगाने की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि मेडिकल डिवाइस के आयात मूल्य और उपभोक्ता द्वारा चुकाए जाने वाली कीमत में बड़ा अंतर है। ऐसें में जब इलाज के दौरान किसी मरीज को मेडिकल डिवाइस की जरूरत पड़ती है तो उसे इसके लिए बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है।

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