चूहों को मारने के लिए 'कॉन्ट्रैक्ट किलर' को ठेका

लखनऊ (21 अगस्त): ब्रिटिशकालीन चारबाग रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्मों के नीचे सुरंगें बना चुके सैंकड़ों मोटे-मोटे चूहों से निजात पाने के लिए उन्हें मारने का ‘ठेका’ एक निजी कंपनी को दिया है। चूहों को मारने के लिए एक निजी कंपनी को 4.76 लाख रुपए का ठेका दिया गया है। यह ठेका एक साल का है और काम इस माह के अंत में शुरू हो सकता है।

चूहे मारने वाला दल आसपास के इलाकों, प्लेटफॉर्मों, इमारतों और शंटिंग यार्डे को कवर करेगा। इसमें प्रतिमाह लगभग 40 हजार रुपए का खर्च आएगा। कंपनी चूहे मारने के लिए खाने योग्य चीजें बनाएगी और इसकी सामग्री विश्व स्वास्थ्य संगठन के नियमों के अनुरूप होगी। ऐसा ही एक अभियान वर्ष 2013 में चलाया गया था लेकिन तब इसके बाद की कार्रवाई न की जाने की वजह से नतीजे उम्मीद के अनुरूप नहीं रहे थे।

अधिकारी ने कहा कि प्लेटफॉर्मों और आधिकारिक इमारतों में चूहों के प्रकोप के कारण पिछले साल विक्रेताओं का 10 लाख रुपए का भारी नुकसान हुआ। इससे न सिर्फ विक्रेता बल्कि यात्री भी डरे हुए हैं। चूहे क्लॉक रूम में रखे हुए बैगों को भी कुतर गए। आपको आधा किलो के वजन वाले चूहे भी यहां नजर आ सकते हैं।

एक यात्री ने कहा कि इनसे बच्चों को भी खतरा है क्योंकि यदि आपका ध्यान नहीं होता है तो ये काट भी सकते हैं। स्नैक्स बेचने वाले एक विक्रेता ने कहा कि चूहे खाने के पैकेट भी कुतर जाते हैं और कोई ध्यान दे इससे पहले ही भाग जाते हैं। चूहों के इस आतंक के बीच रेलवे के कर्मचारियों को स्टेशन के रिकॉर्ड रूम में रखे महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों के टुकड़े इकट्ठे करने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। इस स्टेशन की नींव 1914 में रखी गई थी और इसकी इमारत 1923 में बनकर तैयार हुई थी।