रसगुल्ले को लेकर छिड़ी लड़ाई कोर्ट में

नई दिल्ली(22 अगस्त): रसगुल्ले पर अपना-अपना दावा पेश करने को लेकर पश्चिम बंगाल और ओडिशा के बीच छिड़ी तकरार अब कोर्ट तक पहुंच गई है। पश्चिम बंगाल सरकार ने रसगुल्ले पर अपना दावा करते हुए भौगोलिक संकेत (GI टैग) के लिए कोर्ट में अपील की है। हालांकि ओडिशा सरकार ने रसगुल्ले पर अपना दावा पेश करने के लिए ऐसी कोई अपील नहीं की है।

- राज्य सरकार के विज्ञान एवं तकनीक विभाग की नोडल ऑफिसर महुआ होम चौधरी केस को जीतने के लिए काफी आश्वस्त हैं। मामले की पहली सुनवाई साल्टलेक कोर्ट में 22 अगस्त को होगी। रसगुल्ला का उद्भव स्थान बंगाल ही है, यह साबित करने के लिए राज्य सरकार ने कई दस्तावेज भी प्रस्तुत किए हैं। इनमें से एक कृष्णदेव कविराज की चैतन्य चरितामृत भी है। इस किताब में रसगुल्ले का कई बार जिक्र किया गया है।

- महुआ होमचौधरी ने बताया, मामले की सुनवाई तो 22 अगस्त से शुरू हो जाएगी लेकिन मामले का अंतिम निर्णय आने में शायद एक साल लग जाए।

- उन्होंने कहा कि एक बार रसगुल्ले पर जीआई टैग मिल जाए उसके बाद बंगाल की इस मिठाई को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने के लिए प्रयास किए जाएंगे।

- बंगाल ने रसगुल्ले पर अपना दावा जताने के लिए एक मजबूत तर्क दिया है। बंगाल का तर्क है कि यह मिठाई छेने से बनती है और छेना तो बंगाल का ही उत्पाद है। बंगाल का मानना है कि स्पंज वाला रसगुल्ला पहली बार नवीनचंद्रदास ने बनाया था।

- रसगुल्ले के अलावा बंगाल चावल की दो प्रजातियों गोविंदभोग और तुलाईपंजी पर भी जीआई टैग चाहता है।