16 साल की रेप पीड़‍िता का सवाल, 'कौन पालेगा मेरा बच्चा'

नई दिल्ली (15 सितंबर): एक रेप पीड़‍िता को अदालत 33 हफ्ते पुराने भ्रूण को गिराने की अनुमति नहीं दे रहा है। 16 साल की इस पीड़िता पर अदालत ने मेडिकल पैनल की एक रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला दिया। पैनल ने अपनी रिपोर्ट देने में करीब एक हफ्ते का कीमती समय ले लिया।

पीड़िता ने कहा कि व्यवस्था 'ना तो उसका गुस्सा समझती है और ना ही व्यवस्था को उसकी स्थिति से कोई सहानुभूति' ही है। पीड़िता अब दूसरी बार इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने वाली है। उसे अदालत से सवाल पूछना है कि बच्चे के पैदा होने की स्थिति में उसकी देखभाल कौन करेगा।

पीड़िता 24 अगस्त को गर्भपात कराने की अनुमति मांगने हाई कोर्ट पहुंची थी। पीड़िता ने कोर्ट से कहा कि अपनी आर्थिक स्थिति के कारण वह बच्चे की परवरिश करने की हालत में नहीं है। साथ ही, उसने अदालत में यह भी कहा कि बच्चा उसे हमेशा अपने साथ हुए अपराध की तकलीफ और शर्म याद दिलाएगा। इसके बावजूद उसे गर्भपात की अनुमति नहीं मिली।

20 हफ्ते से अधिक के गर्भ को गिराने पर मां की जान को खतरा हो सकता है। इसी आधार पर कानून 20 हफ्ते से अधिक के गर्भपात की इजाजत नहीं देता।