रणथंभौर की शान 'मछली' की मौत, जानिए कैसे एक बाघिन बनी मछली

नई दिल्ली (18 अगस्त) : रणथंभौर टाइगर रिजर्व की मशहूर बाघिन 'मछली'(T-16) की आज मौत हो गई। 'मछली' बाघिन की उम्र 19 साल की थी। पिछले पांच दिनों से मछली ने कुछ भी नहीं खाया था। रणथंभौर टाइगर रिजर्व के अधिकारियों के मुताबिक 9.58 पर मछली ने दम तोड़ा। रणथंभौर आने वाले पर्यटकों के मछली सबसे बड़ा आकर्षण होती थी। आईए जानते हैं कैसे एक बाघिन 'मछली' बनी...

- रणथंभौर क्वीन बाघिन 'मछली' का जन्म 1997 में हुआ था। - उसे मछली नाम दिए जाने के पीछे भी एक रोचक कहानी है। - 'मछली' बाघिन के चेहरे पर मछली की जो आकृति बनी हुई थी।  - यह निशानी उसे अपनी मां से विरासत में मिली थी। - उसकी मां के चेहरे पर मछली के आकार का एक चिह्न था। - उसने 11 बाघों को जन्म दिया, जिनमें सात मादा और चार नर थे। - रणथंभौर में बाघों की संख्या के 60% हिस्से का संबंध उसके वंश से ही है। - मछली अपने शिकार के तरीकों, ताकत और कौशल से भी जानी जाती है - 2004 में उसने 10 फीट लंबे मगरमच्छ का शिकार किया था। - क्योंकि मगरमच्छ ने बाघिन के बच्चे पर हमला किया था। - दोनों के बीच जबर्दस्त टक्कर हुई जिसमें उसे अपने कुछ दांत भी गंवाने पड़े।  - 11 बच्चों की मां मछली को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिल चुका है।  - इतना ही नहीं सरकार ने इस बाघिन पर एक डाक टिकट भी जारी किया है। - दुनिया में सबसे ज्यादा फोटो 'मछली' बाघिन के खींचे गए हैं।

कैसे हुई मौत - बाघिन 'मछली' एक रॉयल बंगाल टाइगर है। - रॉयल बंगाल टाइगर की उम्र 10 से 15 साल होती है।  - ऐसे में 20 साल की मछली वन विभाग की दया पर जी रही थी। - चार में से दो शिकारी दांत पांच साल पहले ही टूट चुके थे। - बचे हुए दो भी दो साल पहले गिर गए। - वन विभाग उसे शिकार के रूप में बंधे हुए जानवर दे रहा था। - जबकि वन विभाग के अनुसार कानूनन इस पर पाबंदी है। - लेकिन मछली को जिंदा रखने के लिए यह जरूरी था। - मछली की देखभाल के लिए एक गार्ड हमेशा मौजूद रहता था। - पिछले पांच दिनों से मछली ने कुछ भी नहीं खाया था।