विदर्भ को रणजी ट्रॉफी जिताने वाले इस क्रिकेटर की कहानी सुन रोक नहीं पाएंगे अपने आंसू

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (9 फरवरी): हाल ही में विदर्भ ने रणजी ट्रॉफी के फाइनल में सौराष्ट्र को 78 रन से हराकर लगातार दूसरी बार रणजी ट्राफी खिताब अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ विदर्भ ने यह साबित भी कर दिया कि पिछले साल मिली खिताबी जीत ‘तुक्का’ नहीं थी।

विदर्भ को सौराष्ट्र के खिलाफ खिताब बरकरार रखने के लिये पांचवें और आखिरी दिन पांच विकेट की जरूरत थी। दूसरी ओर जीत के लिये 206 रन के लक्ष्य का पीछा कर रही सौराष्ट्र टीम को 148 रन और चाहिये थे। आखिरी दिन दो सत्र बाकी रहे विदर्भ के गेंदबाजों ने सौराष्ट्र को 127 रन पर आउट कर दिया। विश्वराज जडेजा (52) और कमलेश मकवाना (14) ने पहले घंटे संभलकर बल्लेबाजी की लेकिन यह साझेदारी टूटने के बाद हार तय थी। मैन आफ द मैच बायें हाथ के स्पिनर आदित्य सरवटे ने आज पांच में से तीन विकेट लिये। उन्होंने मैच में 57 रन देकर 11 विकेट चटकाये जिसमें दूसरी पारी के छह विकेट शामिल हैं। सरवटे ने दूसरी पारी में 49 रन बनाकर सौराष्ट्र के सामने 206 रन का लक्ष्य रखा।

विदर्भ की लगातार दूसरी रणजी ट्रॉफी खिताबी जीत का अहम हिस्सा रहे हरफनमौला खिलाड़ी आदित्य सरवटे (29) ने बचपन से ही अपनी मां अनुश्री सरवटे की बहुत मेहनत और संघर्ष को देखा है और उसी से प्रेरणा लेकर वह अपने जीवन में आगे बढ़ रहे हैं। आदित्य जब महज तीन साल के थे, तभी उनके पिता आनंद सरवटे का एक्सीडेंट हो गया था। तब से वह व्हीलचेयर पर हैं। तब से उनकी मां ने घर की जिम्मेदारी ली। तमाम दिक्कतों के बाद भी उनकी मां ने हार नहीं मानी और अपने बेटे को आगे बढ़ाती रहीं। अपनी मां की इसी हार न मानने के नजरिए को आदित्य ने अपने जेहन में उतार लिया।वैसे सरवटे को क्रिकेट खून में मिला है। आदित्य के पिता भी क्रिकेटर रहे हैं। वह नागपुर विश्वविद्यालय और पंजाब नेशनल बैंक के लिए खेला करते थे। इसके अलावा उनके ताऊ चंदू सरवटे ने भारत के लिए नौ टेस्ट मैच खेले हैं। चंदू होल्कर टीम के दिग्गज थे और सीके नायडू और मुश्ताक अली जैसे महान खिलाड़ियों के साथ भारतीय टीम का ड्रेसिंग रूम साझा कर चुके हैं। आदित्य ने कहा, "एक खिलाड़ी परिवार के बिना कुछ नहीं है। क्रिकेट मुझे विरासत में मिली लेकिन मैं आज जो कुछ हूं, उसके लिए मैं अपनी मां का आभारी हूं। मैं जब तीन साल का था तब मेरे पिता का एक्सीडेंट हो गया था। तब से मेरी मां ने ही सब कुछ किया। नौकरी भी की। पापा का ध्यान भी रखा। मेरा भी ध्यान रखा।  मुझे पूरी छूट दी। मैं उनसे काफी प्रेरित रहा हूं। उन्होंने कभी भी हार नहीं मानी और उनका जो नजरिया है, वो मेरे अंदर भी है।" 

राज्य टीम में अपनी जगह पक्की करने के बारे में पूछने पर आदित्य ने कहा, "मैंने पिछले सीजन के बाद कुछ अलग नहीं किया। जो मेहनत करता था वही जारी रखी। हमारी टीम में किसी की भी जगह पक्की नहीं है इसलिए आपके सामने जब भी मौका आए आपको उसे भुनाना होता है।