बिहार के रास्ते कानपुर से रायसीना हिल्स पहुंचे रामनाथ कोविंद , पढिए पूरा सफर

नई दिल्ली(20 जुलाई): आज देश को नया राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के रुप में मिल गया। एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद देश के 14वें राष्ट्रपति होंगे। आइए जानते हैं कि एक किराए के घर से शुरू हुआ उनका सफर, रायसीना हिल्स तक कैसे पहुंच गया।

- कोविंद के पिता एक परचून दुकानदार थे। कोविंद ने आठवीं की कक्षा में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की जीवनी पढ़ी थी, तभी से उनके मन में कुछ नया हासिल करने की इच्छा थी। पिता से पांच रुपए लेकर रुपए लेकर कानपुर की ओर उनके कदम निकल पड़े। 

- कोविंद इंटरमीडियट के बाद डीएबी कॉलेज से स्नातक और लॉ की डिग्री ली। 

- कानपुर में अपनी जिन्दगी के कई साल गुजारने वाले कोविंद को किराए के घर में रहना पड़ा। वकालत की शिक्षा से दक्ष करने वाले कोविंद के गुरु सुमन निगम ने अपने दोस्त कल्याणपुर इलाके के न्यू आजाद नगर निवासी डॉ. आदित्य नारायण दीक्षित (क्राइसचर्च कॉलेज के पूर्व प्रोफ़ेसर) के घर पर इन्हें रूम दिलवाया था। 

- राम नाथ कोविंद 1993 में क्राइसचर्च कॉलेज के पूर्व प्रोफ़ेसर डॉक्टर आदित्य नारायण दीक्षित के मकान पर रहने के लिए आए थे। डॉक्टर दीक्षित बताते हैं कि रामनाथ कोविंद जब हमारे घर पर आए थे तब उनके पास सिर्फ पांच जोड़ी कपड़े थे। पहले दिन वो जमीन पर सोए, हमने तखत दिया तो उन्होंने लेने से इनकार कर दिया। वो संघ और भाजपा के लिए काम करते थे। महीने में चार से पांच दिन के लिए वो कल्याणपुर आते थे, बाकी समय लखनऊ-दिल्ली में रहते थे। 

- आदित्य नारायण दीक्षित की पत्नी आनंद कुमारी कहती हैं कि कोविंद जी का स्वभाव बहुत अच्छा था जितने दिन रहे बड़े प्रेम से रहे। कोविंद जी जब भी घर आते तो हमारे हाथ की बनी तुअर की दाल, चूल्हे की रोटी और आम के अचार के साथ भरपेट भोजन करते थे।

- आनंद कुमारी ने बताया, रामनाथ कोविंद सत्तर के दशक से संघ से जुड़े थे और संगठन के प्रचार-प्रसार के लिए देशभर का दौरा किया करते थे। 1997 में हमने अपने बेटे की शादी के बारे में उन्हें बताया। फरवरी 1997 का माह था, वो दिल्ली में थे, बावजूद रामनाथ कोविंद परिवार समेत कानपुर आए और बाराती बनकर बेटे की ससुराल गए। 

- बहू डॉक्टर अंजू दीक्षित का कहना है कि कोविंद जी ने हमारे घर के दो कमरे किराये पर ले रखे थे। करीब 1993 से 2005 तक यहां रहे हैं। कभी कभी उनकी फैमली आती थी ज्यादातर वो दिल्ली में रहते थे। हमारी शादी पर उन्होंने आर्शीवाद देकर एक कलम दी थी। वो बहुत सरल स्वाभाव के हैं और हमें बहू की तरह मानते हैं।