यहां मुस्लिम कराते हैं रामलीला

नई दिल्ली(9 अक्टूबर): शिव सेना के सदस्यों ने हिंदी फ़िल्म अभिनेता नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी को उनके पुश्तैनी ज़िले उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर में रामलीला में अभिनय नहीं करने दिया। लेकिन लखनऊ के बख्शी का तालाब में एक रामलीला ऐसी होती है, जिसमें रामायण के ख़ास किरदारों की भूमिका मुसलमान ही निभाते हैं।

साल 1972 बख्शी का तालाब में रामलीला शुरू कराने की पहल एक मुसलमान ने ही की थी। मंसूर अहमद ख़ान बख्शी का तालाब इलाक़े में रहते हैं। उन्होंने बताया, "अक्टूबर 1972 में बख्शी का तालाब में पहली बार रामलीला का मंचन मेरे वालिद डॉ मुज़फ़्फ़र हुसैन और पंचायत के अध्यक्ष मैकूलाल यादव ने शुरू करवाई थी"। 

मंसूर ख़ान के मुताबिक, उनके पिताजी हिन्दू-मुस्लिम एकता की एक मिसाल पेश करना चाहते थे। पिछले 46 साल से लगातार बख्शी का तालाब में रामलीला का मंचन हो रहा है। बख्शी का तालाब के रामलीला की ख़ास बात यह है की रामलीला कमेटी में ज़्यादातर लोग मुसलमान हैं और अभिनय भी मुसलमान ही करते हैं। 

मंसूर अहमद का कहना है कि देखने वालों में भी बड़ी तादाद मुसलामानों की होती है।बख्शी के तालाब में रहने वाले 56 साल के साबिर ख़ान पिछले कई साल से रामलीला का निर्देशन कर रहे हैं।

पेशे से किसान साबिर ख़ान तेरह साल की उम्र से बख्शी का तालाब की रामलीला से जुड़े हैं। वो कहते हैं, "मैं रामायण पढता हूँ और मुझे रामायण का पूरा ज्ञान है"। सभी कलाकार अमूमन बख्शी का तालाब से ही चुने जाते हैं। 

इस साल राम की भूमिका में हैं सलमान ख़ान और लक्ष्मण भूमिका में उनके भाई अरबाज़ खान। सलमान ख़ान कहते हैं, "मैं राम की भूमिका कई साल से कर रहा हूँ, इसलिए कई जानने वाले भी मुझे राम के नाम से ही पुकारने लगे हैं। मैं राम बनता हूँ और रावण एक हिन्दू बनता है तो लोगों को ये कॉम्बिनेशन बहुत अच्छा लगता हैं"।