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धारा 144 में रोका तो बिफर पड़े रमेश पोखरियाल; जानिए, फिर क्या हुआ...

अधीर यादव, देहरादून, (5 जून): मथुरा हत्याकांड की तस्वीरें अभी ताज़ा हैं। कि कैसे राजनीति जब पुलिसवालों को नचाती है तो मवाली मठाधीश बन बैठते हैं। खुद अमित शाह ने शिवपाल यादव का इस्तीफा मांगा है। लेकिन उसी बीजेपी के सांसद जब कानून को रौंदने निकलते हैं तो जिले के सबसे बड़े पुलिस अफसर को नौकर चाकर समझने लगते हैं। देहरादून में पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल को जब धारा 144 के उल्लंघन से पुलिस ने रोका तो उन्होंने कितना नाटक किया। एसएसपी को ही देख लेने की धमकी देने लगे। 

राजनीतिक रुतबा तो होता ही ऐसा है कि नियम कायदों से नेताओं को कसने की कोशिश की जाए तो वो ऐसे बौखला जाते हैं। फिर बड़े से बड़े अधिकारियों की खैर नहीं। हरिद्वार से बीजेपी सांसद रमेश पोखरियाल निशंक को कानून तोड़ने से रोकने के लिए पुलिस ने बीच रास्ते में रोका था। निशंक ऐसे बिफरे की सीधे एसएसपी को फोन घुमा दिया। पूर्व मुख्यमंत्री का तमगा और वर्तमान सांसद होने का रुतबा क्या होता है वो पूरे अंदाज में एसएसपी को बताने लगे।

निशंक फोन पर कहने लगे, "तुम जानते नहीं एसएसपी मैं कौन हूं...तुम कल्पना भी नहीं कर सकोगे, हमारी क्या बाध्यता होगी?"

दरअसल हुआ कुछ यूं कि रुड़की के पास लंढौरा में दो समुदायों के बीच बवाल के बाद पुलिस ने इलाके में धारा 144 लगा दी थी। राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए वहां कांग्रेसी नेता हो आए, बीजेपी के ही अजय भट्ट और भगत सिंह कोश्यारी जैसे नेता भी हो आए। निशंक को लगा कि इस मुकाबले में वो कहीं पीछे न छूट जाएं। सो सारे नियम कायदों को ताक पर रखकर अपने काफिले के साथ लंढौरा की ओर निकल पड़े।

पुलिस को जानकारी मिली तो उनके काफिले को रोकने के लिए पीसीआर वैन को रवाना किया गया। इसके बाद सांसद और पुलिसवालों के बीच चूहे बिल्ली का खेल शुरु हो गया।

पुलिस से बचने के लिए निशंक ने अपने काफिले को हाइवे से उतारकर गांव के रास्ते पर ले लिया। आगे आगे सांसद का काफिला चलता रहा और पीछे पीछे उन्हें रोकने को गई पीसीआर की टीम। करीब एक घंटे तक बीजेपी के सांसद अपने ही राज्य की पुलिस से भागते रहे। गांव की सड़कों पर सांसद के कारों का काफिला लहराते हुए दौड़ रहा था। सायरन की आवाज से ऐसा लग रहा था मानों पुलिस किसी गुंडे मवाली या अपराधी का पीछा कर रही हो। लेकिन एमपी साहब कानून तोड़ने को इतने बेताब थे कि पुलिस बेबस महसूस कर रही थी।

पुलिस ने आखिकरकार लक्सर के रणसुरा गांव में निशंक के काफिले को रोक लिया। पुलिस कानून का हवाला देकर उन्हें वापस लौटने की मिन्नतें कर रही थी। और निशंक इस गुस्से में भरे थे कि पुलिस ने उन्हें रोका क्यो। सीधे एसएसपी को फोन लगा के हड़का दिया।

इसके बाद भी निशंक अपनी कार से उतरने को राजी न थे। करीब डेढ़ घंटे तक अपनी कार में शीशे चढ़ाकर बंद रहे। और उनके समर्थक पुलिस से उलझते रहे। पुलिस उन्हें समझाती रही कि देखिए आप सांसद हैं। आपकी पार्टी की देश में सरकार हैं। लोग क्या समझेंगे। कि सत्ताधारी पार्टी का एमपी कानून को जूते की नोक पर रखता है। डेढ़ घंटे तक कार का इंजन स्टार्ट रहा। एसी चलता रहा। लगा कि पेट्रोल न खत्म हो जाए तो कार से नीचे उतरे। तब जाकर पुलिस ने गिरफ्तारी की रस्म अदा की। 


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