केंद्रीय मंत्री आठवले ने उठाई प्राइवेट नौकरियों में आरक्षण की मांग

नई दिल्ली (22 दिसंबर): उत्तर प्रदेश में फरवरी-मार्च में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। लिहाजा तमाम पार्टियां वोटरों को रिझाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ओबीसी की 17 जातियों को अनुसूचित जातियों में करके अपनी तरफ से बड़ा चुनावी कार्ड खेला है।

वहीं केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) के अध्यक्ष रामदास आठवले ने अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ी जातियों के लिए प्राइवेट सेक्टर की नौकरियों में आरक्षण देने की मांग की है। अठावले ने कहा कि ज्यादातर नौकरियां प्राइवेट सेक्टर में पैदा हो रही हैं। इससे सरकारी नौकरियों में रोजगार के कम अवसर पैदा हो रहे हैं और दलितों को सिर्फ सरकारी नौकरियों में रिजर्वेशन से फायदा नहीं मिलेगा। यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि प्राइवेट सेक्टर की नौकरियों में आरक्षण लागू हो।

आपको बता दें कि फिलहाल 49.9 फीसदी सरकारी नौकरियां अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ी जातियों के लिए आरक्षित हैं। सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास अठावले का कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी प्राइवेट सेक्टर में रिजर्वेशन की जरूरत का मुद्दा उठाया था। साथ ही यूपीए सरकार ने भी इसकी संभावना की जांच करने के लिए कमिटी गठित की थी। हालांकि इससे कुछ सामने नहीं आया था।

साथ ही अठावले ने मांग की है कि आरक्षण की मौजूदा सीमा 49.5 फीसदी से बढ़ाकर 75 फीसदी कर दिया जाना चाहिए। ताकि इसमें अगड़ी जातियों में आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को भी उसमें शामिल किया जा सके। उन्होंने कहा कि संविधान में संशोधन होना चाहिए ताकि नौकरियों और शिक्षा में रिजर्वेशन का फायदा गरीबों समुदायों तक पहुंच सके।