राष्ट्रहित में राम सेतु को नष्ट नहीं करेगी सरकार: सुप्रीम कोर्ट से केंद्र ने कहा

नई दिल्ली ( 17 मार्च ): केंद्र सरकार ने रामसेतु के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर बताया कि महत्वाकांक्षी सेतुसमुद्रम परियोजना के लिए रामसेतु को क्षति नहीं पहुंचाया जाएगा। केंद्र सरकार इस परियोजना के लिए वैकल्पिक रास्ते की संभावना पर काम कर रही है। हलफनामे में ये बताया गया है कि मौजूदा ढांचे से देश के सामाजिक और आर्थिक ताने बाने पर असर होगा। रामसेतु के संबंध में भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने याचिका दायर कर सेतुसमुद्रम परियोजना पर रोक लगाने की मांग की थी। स्वामी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि क्या वो रामसेतु को संरक्षित करना चाहते हैं या पौराणिक रामसेतु में किसी तरह का बदलाव करेंगे।

केंद्रीय जहाजरानी मंत्रालय के नए हलफनामे के बाद केंद्र सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद ने कहा कि केंद्र सरकार के हलफनामे के बाद अब याचिका को खारिज किया जा सकता है। केंद्रीय जहाजरानी मंत्रालय द्वारा दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि भारत सरकार देश हित में रामसेतु को बिना नुकसान पहुंचाए सेतु समुद्रम शिप चैनल प्रोजेक्ट के लिए पहले से तय किए गए अलाइंमेंट का विकल्प खोजने के लिए इच्छुक है। वहीं इस संबंध में याचिकाकर्ता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि वो सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे और अदालत से रामसेतु को राष्ट्रीय विरासत घोषित कराने की मांग करेंगे।

रामसेतु भारत के पंबन द्वीप से श्रीलंका के मन्नार द्वीप के बीच करीब 50 किमी लंबी चूना पत्थरों की श्रृंखला है। हिंदू मान्यता के मुताबिक इस सेतु को भगवान राम की वानर सेना ने बनाया था।