सिरसा में रची गई थी श्रीगंगानगर में हमले की साजिश

श्रीगंगानगर (27 अगस्त): राम रहीम के गुडों ने हिंसा फैलाने के लिए बड़े बड़े पैमाने पर साजिश रची थी। ये खुलासा किया है श्रीगंगानगर की पुलिस ने। श्रीगंगानगर पुलिस के मुताबिक पंचकुला सीबीआई की विशेष अदालत के डेरा मुखी पर निर्णय को लेकर डेरा प्रेमियों ने 16 अगस्त को ही सिरसा डेरा में गुप्त बैठक कर पेट्रोल बमों से हमले की साजिश रची थी। इसमें सजा सुनाए जाने की स्थिति में जिला मुख्यालय के सारे सरकारी कार्यालयों और रोडवेज की बसों को जलानी थी। बाकायदा इसके लिए फाेन पर कोड तय किए गए थे। यह सनसनीखेज खुलासा शुक्रवार को पेट्रोल बम फेंककर दो सरकारी कार्यालयों में आग लगाने के पकड़े गए आरोपियों ने पुलिस जांच में किया है। 

एएसपी सुरेंद्र सिंह ने बताया की डेरा प्रेमियों की 16 अगस्त को सिरसा में बैठक में सजा होने पर आरोपियों को फोन पर कोड 4250 बताना था,जिस पर उन्हें सरकारी कार्यालयों और बसों को पेट्रोल बम से जलाना था। वहीं,बरी होने पर 1650 कोड फोन पर बताया जाना था। इस कोड के बाद डेरा प्रेमियों ने श्रीगंगानगर शहर में मार्च निकाल एक-दूसरे को बधाइयां बांटकर खुशी जतानी थी। पुलिस अधिकारियो ने बताया की पेट्रोल बम फेंकने के राउंडअप किए गए आरोपी सेतिया फार्म निवासी हिमांशु चराया ने पूछताछ में बताया है कि सिरसा में सभी ब्लॉक भंगीदास को बुलाया हुआ था। यहां से पुरानी आबादी टावर के पास निवासी राजकुमार अरोड़ा सहित अन्य भंगीदास भी गए हुए थे। इनको सिरसा में डेरा प्रबंधकों ने निर्देश दिए थे कि अगर कोर्ट गुरमीत रामरहीम इंसा को सजा सुनाए तो आपको फोन पर कोड 4250 कर दो बोला जाएगा। 

इसके बाद श्रीगंगानगर के सभी न्यायालयों में पेट्रोल बम फेंक कर वारदात करनी होगी। डेरा प्रमुख के बरी होने पर 1650 कोड फोन पर बताया जाना था। इस कोड के बाद डेरा प्रेमियों ने शहर में मार्च निकाल एक-दूसरे को बधाइयां बांटकर खुशी जतानी थी। वहीं 21 अगस्त को भी श्रीगंगानगर शहर के पुरानी अाबादी एरिया में ही एक मकान में दोबारा ब्लॉक भंगीदास राजकुमार की अध्यक्षता में बैठक कर तैयारियां की। 24 अगस्त को ही मोटरसाइकिलों की टंकियों में पेट्रोल भरवाया गया। साइकिल की ट्यूब इकट्ठी कर मोटरसाइकिलों की टंकी से पेट्रोल निकालकर ट्यूबों में भरकर पेट्रोल बम तैयार किए गए। इसके साथ ही टीमें तैयारी की गई थी। लेकिन 25 अगस्त को कोर्ट परिसर रोड पर भारी पुलिस जाब्ते के कारण आरोपियों की हिम्मत नहीं हुई। इसके बाद सरकारी कार्यालयों और बोलेरो को पेट्रोल बम से जलाया गया।