क्या महामृत्‍युंजय मंत्र से बेहतर हो सकते हैं हेड इंजरी मरीज ?, RML कर रहा स्‍टडी

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पल्लवी झा, न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (12 सितंबर): गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के बचाव के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप लोग कराते रहे हैं, अबतक इसे महज उनकी आस्था ही माना जाता रहा है। लेकिन अब दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल में इसके प्रभाव को जानने के लिए स्टडी की जा रही है। इस मंत्र के प्रति लोगों की आस्था और विश्वास को साइंटिफिक तरीके से प्रमाणित करने के लिए स्टडी राम मनोहर लोहिया अस्पताल और  कुतुब इंस्टिट्यूशनल एरिया स्थित संस्कृत विद्यापीठ से संपर्क के साथ किया जा रहा है। प्रोफेसर बिहारी लाल जो कि संस्कृत  विद्यापीठ के प्रोफसर हैं उनका कहना है कि  हेड इंजरी के मरीजों को इस मंत्र को सुनाने का प्रयोग देश में पहली बार राम मनोहर लोहिया अस्पताल में किया गया है, और कहा जा रहा है की  अच्छे संकेत भी मिल रहे हैं।प्रोफेसर का दावा का है कि कुछ महीनों के अंदर फाइनल रिपोर्ट आ जाएगी।

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क्या है ये  स्टडी आइए आपको बताते हैं

संस्कृत  विद्यापीठ के प्रोफेसर  ने बताया कि तीन साल की स्टडी है, जो अंतिम चरण में है।अस्पताल के न्यूरोसर्जन डॉक्टर अजय चौधरी और उनकी टीम इस पर स्टडी कर रही है। 40 लोगों पर स्टडी की गई है, 20-20 के दो ग्रुप्स बनाए गए। हेड इंजरी के मरीजों को दो अलग-अलग ग्रुप में बांटा गया। हेड इंजरी के इलाज का जो प्रोटोकॉल है उसके अनुसार दोनों ग्रुप के मरीजों का इलाज किया गया, लेकिन इसमें से एक ग्रुप को महामृत्युंजय मंत्र सुनाया गया। यह काम आईसीयू से बाहर हीलिंग के दौरान किया गया। स्टडी के तहत मरीज को पहले अस्पताल के अंदर ही संकल्प कराया गया, फिर मरीज को संस्कृत विद्यापीठ भेजा गया और वहां पर ऑर्गनाइज तरीके से महामृत्युंजय मंत्र का प्रयोग किया गया। महामृत्युंजय जाप जिसे  त्रयंबकम मंत्र भी कहते हैं । कहा जाता है कि इस मंत्र के जाप करने मात्र से मौत भी परास्त हो जाती है ऐसे में अस्पताल में चल रहा यह शोध काफ़ी दिलचस्प है।बहरहाल इस मंत्र का कितना फायदा उन मरीजों पर हुआ, यह दूसरे ग्रुप के साथ आकलन किया जा रहा है। हिन्दू परंपरा में आस्था का बहुत महत्व है  । इसीलिए कहते भी हैं विश्वासी फलदायी ।ऐसे में विश्वास ,आस्था और विज्ञान के साथ जो प्रयोग हो रहा है विश्व के वैज्ञानिकों के लिए भी आश्चर्य चकित करने वाला है।फ़िलहाल अभी इस शोध पर अंतिम बिंदु नहीं लगा है। आकलन के बाद इस रिपोर्ट को मेडिकल जर्नल में भेजा जाएगा।