WATCH: पहली बार सड़क पर राजघराना

केजे श्रीवत्सन, जयपुर (1 सितंबर): राजमहल पैलेस परिसर के एक हिस्से को कब्ज़े में लेने के मामले में जयपुर राजघराने ने अपनी ताकत दिखा दी है। क़ानूनी लडाई के साथ-साथ अब राजपरिवार ने इसे आंदोलन की शक्ल भी दे दी है और और सरकारी कार्रवाई की अगुवाई खुद महारानी पद्मिनी व उनके उत्तराधिकारी पद्मनाभ ने की।

प्रजातंत्र में भी राजघराने के प्रति लोगों की सहानुभूति से राजपरिवार के लोग इतने उत्साहित हो गए कि अब तक सबसे अलग-थलग रहने वाले राजमहल के दरवाजे को महीने में दो दिन आम जनता के लिए खोलने का ऐलान कर दिया गया।

पद्मिनी देवी के अखबारों में दिए विज्ञापन को देखकर जमा राजपरिवार के साथ राजपूत समाज और विभिन्न संगठन के लोग त्रिपोलिया गेट पर जमा हुए। इसके बाद एक रैली के रूप में इन सभी ने राजमहल पैलेस तक का कूच किया। समूचे रास्ते नारेबाजी के जरिए इस लोकतान्त्रिक व्यवस्था के दौर में राजपरिवार ने अपनी ताकत भी सरकार को दिखाने की पूरी कोशिश की। राजपरिवार की जमीन पर कब्ज़ा करने को लेकर पूर्व राजपरिवार सहित राजपूत समाज के लोगों में सरकार के प्रति ज़बरदस्त आक्रोश नज़र आया।

कहने को तो ये मौन रैली थी, लेकिन सरकार और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। राजपरिवार नगर निगम के जेडीसी को बर्खास्त करने के अलावा राजमहल पैलेस होटल के सील किए गए मुख्य द्वार खोलने और सारे जमीनी विवाद आपसी समझौते या कोर्ट के जरिए निपटाने की मांग कर रहा है। हालांकी राजपरिवार की ओर से अधिकारीयों पर कार्रवाई की तो मांग की गई लेकिन मुख्यमंत्री के खिलाफ बयान देने से बचते रहे।

महारानी पद्मिनी पूर्व राजघराने की राजमाता ने कहा.. - मुख्यमंत्री या सरकार के खिलाफ यह रैली नहीं है, मुख्यमंत्री तो बाहर गई हुई थी। - मेरी बेटी दीया कुमारी का अधिकारीयों ने अपमान किया है। हमारी जमीन जबरदस्ती छीनी जा रही है। - मैं एलान करती हूं कि महीने के दो बार अब हमारे द्वार आम जनता के लिए खुले होंगे। - जनता अपना दुख-दर्द बताकर हमसे कभी भी मिलने आ सकती है।

वीडियो:

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