स्ट्रगल करते राजेश खन्ना के लिए यह फिल्म बनीं थी संजीवनी

मुंबई (29 दिसंबर): काका ने जैसा सुपर स्टारडम देखा वो किसी और हीरो को नसीब नहीं हुआ, लेकिन वो मुकाम पाने के लिए राजेश खन्ना को भी काफी स्ट्रगल करना पड़ा था। बॉलीवुड में हाथ आजमाने के लिए राजेश खन्ना 1965 में मायानगरी तो पहुंच गए, उन्हें फिल्में भी मिल गईं। लेकिन मंझे कलाकारों की भीड़ में उन्हें पैर जमाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। फिर आई फिल्म आराधना, ये फिल्म ऐसी हिट हुई कि इसने न सिर्फ राजेश खन्ना की आराधना पूरी की बल्कि बॉलीवुड को भी अपना पहला सुपरस्टार दे दिया।

फिल्म में दिलचस्प किरदारों की तरह ही अमृतसर के बांका जवान जतिन खन्ना की राजेश खन्ना से सुपरस्टार बनने की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। बॉलीवुड में पैर जमाने से पहले राजेश खन्ना का नाम जतिन खन्ना हुआ करता था। राजेश खन्ना ने भी फिल्म में काम पाने के लिए निर्माताओं के दफ्तर के चक्कर लगाए। स्ट्रगलर होने के बावजूद वे महंगी कारों में निर्माताओं के यहां जाते थे, उनके पास जो गाड़ियां हुआ करती थी उस दौर के हीरोज के पास भी नहीं हुआ करती थी।

अदाकारी में राजेश खन्ना के करियर की शुरुआत साल 1965 में तब हुई जब वो एक नेशनल टैलेंट कॉन्टेस्ट में विनर बने। कॉन्टेस्ट जीतते ही राजेश खन्ना को दो फिल्में मिल गईं। डायरेक्टर रविन्द्र दवे ने फिल्म 'राज' और चेतन आनंद ने फिल्म 'आखिरी खत' के लिए राजेश खन्ना को साइन किया। दोनों डायरेक्टर ने राजेश खन्ना को जब अपनी फिल्मों के लिए साइन किया था, तब उन्होंने ख्वाब में भी सोचा नहीं होगा कि वो आने वाले वक्त में बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार को साइन कर रहे हैं।

हालांकि 1966 में रीलीज हुई राजेश खन्ना की पहली फिल्म 'आखिरी खत' और इसके अगले साल आई फिल्म 'राज' बॉक्स आफिस पर बुरी तरह से फ्लाप रही, लेकिन इन दोनों ही फिल्मों में उन्होंने अपनी अदाकारी की छाप जरूर छोड़ी। इसका नतीजा ये हुआ कि 1967 में शक्ति सामंत ने उन्हें फिल्म 'आराधना' के लिए साइन कर लिया। फिल्म आराधना 1969 में आई फिल्मों में सबसे बड़ी हिट साबित हुई।

आराधना ने कामयाबी के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। इस फिल्म से पहले तक बॉलीवुड के हिट कलाकारों को सिर्फ स्टार कहा जाता था, लेकिन राजेश खन्ना ऐसे सितारा बने जिनकी चमक बाकी सभी से अलग थी। उन्हें स्टार की जगह सुपरस्टार कहा जाने लगा और इस तरह बॉलीवुड को मिल गया पहला सुपर स्टार।

राजेश खन्ना ने जिस दौर में बॉलीवुड में कदम रखा था, उस दौर में राज कपूर, देव आनन्द और दिलीप कुमार जैसे सितारे बुलंदी पर थे। सुनील दत्त, जीतेन्द्र और धर्मेंन्द्र भी अपने पैर जमा चुके थे। शम्मी कपूर, राजेन्द्र कुमार, शशी कपूर और मनोज कुमार की लोकप्रियता भी कम नहीं थी, लेकिन अमृतसर से आए इस नए चॉकलेटी हीरो ने मुम्बई की मायानगरी की हवा ही बदल दी।

आराधना की कामयाबी के बाद राजेश खन्ना के घर फिल्म प्रोड्यूसरों की लाइन लग गई। राजेश खन्ना ने एक साथ कई फिल्में साइन की और एक के बाद एक 15 सुपर हिट फिल्में देकर एक रिकॉर्ड बना दिया। आराधना के अलावा काका की कुछ यादगार फिल्म कटी पतंग, दुश्मन, अमर प्रेम, सफर, बावर्ची, आनंद, नमक हराम, रोटी, कुदरत, थोड़ी सी बेवफाई, सौतन और अगर तुम न होते हैं।

राजेश खन्ना फिल्मों की कामयाबी की गारंटी बन गए थे। काका ने अपने करियर में 180 फिल्मों में काम किया। इनमें उनकी 100 से ज्यादा फिल्में तो सोलो हिट थीं। इनमें 50 से ज्यादा फिल्में गोल्डन जुबिली और लगभग 20 सिल्वर जुबिली हुईं। लेकिन जब हिंदी सिनेमा में एंग्री यंग मैन अमिताभ बच्चन आए तो वक्त बदल गया। सुपर स्टार राजेश खन्ना के सितारे भी गर्दिश में चले गए। राजेश खन्ना 80 के दशक में भी फिल्में करते रहे, लेकिन वो स्टारडम अब कहीं गुम हो चुका था।

फिल्मी और निजी जिंदगी में एक के बाद एक कई चोटें लगीं। कई बार फिल्मों में वापसी की भी कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे। साल 2012 में काका अचानक एक विज्ञापन में दिखे। कैमरे के सामने काका की ये शायद आखिरी अदाकारी थी। लंबी बीमारी के बाद काका इस दुनिया से कूच कर गए। राजेश खन्ना भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी फिल्में और उन फिल्मों में निभाए उनके किरदार उनके होने का अहसास कराते हैं।