पुण्यतिथि विशेष: लिपस्टिक से लाल हो जाया करती थीं राजेश खन्ना की कार, ऐसा था उनका स्टारडम

मुंबई (18 जुलाई): बॉलीवुड के पहले सुपर स्टार राजेश खन्ना की आज 5वीं पुण्यतिथि है। आज ही के दिन 18 जुलाई 2012 को राजेश खन्ना ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। भले ही आज राजेश खन्ना हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनकी फिल्में, उनके गाने फैन्स के दिलों में सैकड़ों सालों तक जिंदा रहेंगे। 

फिल्मों में दिलचस्प किरदारों की तरह ही अमृतसर के बांका जवान जतिन खन्ना की राजेश खन्ना से सुपरस्टार बनने की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। बॉलीवुड में पैर जमाने से पहले राजेश खन्ना का नाम जतिन खन्ना हुआ करता था। राजेश खन्ना ने भी फिल्म में काम पाने के लिए फिल्म निर्माताओं के दफ्तर के चक्कर लगाए। स्ट्रगलर होने के बावजूद वे महंगी कारों में फिल्मों में काम मांगने जाया करते थे। उनके पास जो गाड़ियां हुआ करती थी उस दौर के हीरोज के पास भी नहीं हुआ करती थी।

अदाकारी में राजेश खन्ना के करियर की शुरुआत साल 1965 में तब हुई जब वो एक नेशनल टैलेंट कॉन्टेस्ट में विनर बने। कॉन्टेस्ट जीतते ही राजेश खन्ना को दो फिल्में मिल गईं। डायरेक्टर रविन्द्र दवे ने फिल्म 'राज' और चेतन आनंद ने फिल्म 'आखिरी खत' के लिए राजेश खन्ना को साइन किया। दोनों डायरेक्टर ने राजेश खन्ना को जब अपनी फिल्मों के लिए साइन किया था, तब उन्होंने ख्वाब में भी सोचा नहीं होगा कि वो आने वाले वक्त में बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार को साइन कर रहे हैं। हालांकि 1966 में रीलिज हुई राजेश खन्ना की पहली फिल्म 'आखिरी खत' और इसके अगले साल आई फिल्म 'राज' बॉक्स आफिस पर बुरी तरह से फ्लाप रही। लेकिन इन दोनों ही फिल्मों में उन्होंने अपनी अदाकारी की छाप जरूर छोड़ी। इसका नतीजा ये हुआ कि 1967 में शक्ति सामंत ने उन्हें फिल्म 'आराधना' के लिए साइन कर लिया। फिल्म आराधना 1969 में आई फिल्मों में सबसे बड़ी हिट साबित हुई। मेरे सपनों की रानी गाते हुए राजेश खन्ना जब स्टारडम के शिखर पर पहुंचे तब उनके नाम पर ना जाने कितने बच्चों के नाम राजेश रख दिए गए। आराधना ने कामयाबी के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। इस फिल्म से पहले तक बॉलीवुड के हिट कलाकारों को सिर्फ स्टार कहा जाता था। लेकिन राजेश खन्ना ऐसे सितारा बने जिनकी चमक बाकी सभी से अलग थी। उन्हें स्टार की जगह सुपर स्टार कहा जाने लगा और इस तरह बॉलीवुड को मिल गया पहला सुपर स्टार। 

राजेश खन्ना ने जिस दौर में बॉलीवुड में कदम रखा था, उस दौर में राज कपूर, देव आनन्द और दिलीप कुमार जैसे सितारे बुलंदी पर थे। सुनील दत्त, जीतेन्द्र और धर्मेंन्द्र भी अपने पैर जमा चुके थे। शम्मी कपूर, राजेन्द्र कुमार, शशि कपूर और मनोज कुमार की लोकप्रियता भी कम नहीं थी। लेकिन अमृतसर से आए इस नए चॉकलेटी हीरो ने मुंबई की मायानगरी की हवा ही बदल दी। आराधना की कामयाबी के बाद राजेश खन्ना के घर फिल्म प्रोड्यूसरों की लाइन लग गई। राजेश खन्ना ने एक साथ कई फिल्में साइन की और एक के बाद एक 15 सुपर हिट फिल्में देकर एक रिकॉर्ड बना दिया। आराधना के अलावा कटी पतंग, दुश्मन, अमर प्रेम, सफर, बावर्ची, आनंद, नमक हराम, रोटी, कुदरत, थोड़ी सी बेवफाई, सौतन, अगर तुम न होते,  जैसी फिल्में हैं। वो ऐसा दौर था जब राजेश खन्ना फिल्मों की कामयाबी की गारंटी बन गए थे। काका ने अपने करियर में 180 फिल्मों में काम किया, इनमें 100 से ज्यादा फिल्में तो सोलो हिट थीं। इनमें 50 से ज्यादा फिल्में गोल्डन जुबली और लगभग 20 सिल्वर जुबिली हुईं।

1969 से 1975 तक  का एरा राजेश खन्ना के नाम था। ये वो दौर था जब राजेश खन्ना सुपर स्टारडम के चरम पर थे। एक के बाद एक 15 सुपरहिट फिल्मों ने उन्हें हिंदी सिनेमा का सबसे रौशन सितारा बना दिया था । फिल्म इंडस्ट्री में राजेश खन्ना को प्यार से काका कहा जाता था। जब वे सुपरस्टार थे तब एक कहावत बड़ी मशहूर थी- ऊपर आका और नीचे काका। सत्तर के दशक में राजेश खन्ना का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा था । फैन्स का जो प्यार राजेश खन्ना को मिला वैसा क्रेज, वैसी लोकप्रियता किसी और को हासिल नहीं हुई। लड़कियों ने उन्हें खून से खत लिखे। कई बार उनकी सफेद विदेशी कार को लड़कियां होठों की लिपिस्टिक से गुलाबी कर देती थीं। कईयों ने उनकी फोटो से शादी कर ली। कुछ ने अपने हाथ या पैर पर राजेश खन्ना के नाम का टैटू गुदवा लिया, कई लड़कियां उनकी फोटो तकिये के नीचे रखकर सोती थी और जब राजेश खन्ना ने अचानक डिंपल से शादी कर ली तो कई लड़कियों ने सुसाइड कर लिया। 

उस दौर में निर्माता-निर्देशक राजेश खन्ना के घर के बाहर लाइन लगाए खड़े रहते थे। निर्माता उन्हे मुंहमांगे दाम देकर साइन करना चाहते थे, एक बार पाइल्स के ऑपरेशन के लिए राजेश खन्ना को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था, तब ये राजेश खन्ना के स्टारडम का ही कमाल था कि उनको साइन करने के लिए लालाइत निर्माता निर्देशकों ने अस्पताल के के सभी कमरे बुक करा लिए थे ताकि वो राजेश खन्ना को अपनी कहानी सुना सकें। लेकिन जब हिंदी सिनेमा में एंग्री यंग मैन अमिताभ बच्चन आए तो वक्त बदल गया। सुपर स्टार राजेश खन्ना के सितारे भी गर्दिश मे चले गए। राजेश खन्ना 80 के दशक में भी फिल्में करते रहे, लेकिन वो स्टारडम अब कहीं गुम हो चुका था। फिल्मी और निजी जिंदगी में एक के बाद एक कई चोटें लगीं।

कई बार फिल्मों में वापसी की भी कोशिश की लेकिन नाकाम रहे। साल 2012 में काका अचानक एक विज्ञापन में दिखे। कैमरे के सामने काका की ये शायद आखिरी अदाकारी थी। लंबी बीमारी के बाद आज से ठीक 5 साल पहले काका इस दुनिया से कूच कर गए। राजेश खन्ना अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनकी फिल्में और उन फिल्मों में निभाए उनके किरदार उनके होने का अहसास कराते हैं।