यहां मिड डे मिल बनता है आवारा कुत्तों का निवाला

के जी श्रीवत्सन, सवाई माधोपुर (23 फरवरी): मिल डे मिल को लेकर राजस्थान की वसुंधरा सरकार भले ही कितने ही दावे क्यों ने करे, लेकिन यहां के सावाई माधोपुर के खाट कलां सरकारी स्कूल में इसकी पोल खुल रही है। यहां बच्चों को मिड डे मिल के तहत खाना तो मिलता है लेकिन ये उन्हें नसीब नहीं होता है। दरअसल स्कूल में जैसे ही बच्चों के खाने का वक्त होता है यहां आवारा कुत्तों का हूजूम उमड़ पड़ता है और ये कुत्ते बच्चों की थाली से उनका निवाला छिन लेते हैं।  

इस स्कूल में पढने वाले ज्यादातर बच्चों की उमर 7 से 8 साल के बीच है, जिसके चलते ये छोटे बच्चे झुण्ड में आने वाले इन आवारा कूत्तों से अपना खाना बचा पाने में सक्षम हो पाते और अगर वो प्रयास भी करते हैं तो ये कुत्ते इन बच्चों को अपना दांत दिखाकर डरा देतें है।  नतीजा ये होता है कि ज्यादातर बच्चों को इस स्कूल में बिना खाने के ही पढाई करनी पड़ती है।

 

स्कूल के हैडमास्टर मन्नु लाल की माने तो स्कूल में बाउन्ड्री नहीं होने की वजह से आवारा कुत्तों का खौफ है। बाउन्ड्री बनाने के लिए तकरीबन 10 लाख रुपये की जरूरत है और इसके लिए कई बार स्थानीय शिक्षा विभाग को वो लिख भी चुके हैं, लेकिन अबतक इसपर कोई कार्रवाई नहीं हो पायी है। इससे परेशान स्कूल के हेडमास्टर ने बाउन्ड्री बनाने के लिए गांव वालों से दान देने की अपील की है।

स्कूल में बाउन्ड्री न होने की वजह से कई बार छोटे बच्चों इन आवारा कुत्तों के दांतों में से छूटी रोटी खा लेते है। वहीं इन बच्चों को जिन बर्तनों में खाना परोसा जाता है वो भी कूत्तों की लार से संक्रमित हो जाता है जिसे ये बच्चे ही धोकर दुसरे दिन इसका इस्तेमाल करतें है। इस स्कूल मे बच्चों की हालत देखकर साफ पता चलता है कि प्रदेश में शिक्षा विभाग में दावों की जगह प्रयासों की जरूरत हैं।