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भारतीय ‘सुदर्शन चक्र’ से कांप जाएगा दुश्मन का दिल, थार में सेना का युद्धाभ्यास

पाकिस्तान सीमा के निकट पोखरण रेंज में भारतीय सेना की एक टुकड़ी के जवानों ने लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और तोपों की सहायता से अपनी मारक क्षमता और ताकत का प्रदर्शन कर रही है।

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केजे श्रीवत्सन, न्यूज 24  ब्यूरो, जयपुर(22 अक्टूबर): पाकिस्तान सीमा के निकट पोखरण रेंज में भारतीय सेना की एक टुकड़ी के जवानों ने लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और तोपों की सहायता से अपनी मारक क्षमता और ताकत का प्रदर्शन कर रही है। इस युद्धाभ्यास को सिंधु सुदर्शन नाम दिया गया है, जिसमे थल सेना की स्ट्राइक कोर के 40 हजार से भी अधिक दिसंबर तक रेगिस्तान में अत्याधुनिक हथियारों कर साथ दिन, सूर्यास्त और रात के समय लक्ष्यों को पता लगाकर उन्हें नेस्तनाबूद करने के कौशल का नमूना पेश कर संकेत देने की कोशिश कर रहे हैं कि सरहदों पर नापाक निगाहें डालने वालों के लिए वह यमदूत से कम नहीं है। 

थार के रेगिस्तान में दुश्मन के ठिकानों पर सटीक निशाना लगाकर आकाश को चीरते हुए आगे बढ़ रहे हैं। यह लड़ाकू तोप इनमे से एक के बाद एक निकल रहे गोले और मिसाइल्स तेज गर्जना से दुश्मन के ठिकाने पर लगातार गोलियां बरसाते आगे बढ़ रहा रुद्र हेलीकॉप्टर.भारतीय सेना की स्ट्राइक कोर यानी अग्रिम पंक्ति के हमलावर सैनिकों की वह ताकत है, जिसका अंदाजा लगाकर दुश्मन के पांव उखड़ जाएंगे। अपनी सामरिक ताकत को परखने के लिए पोखरण के फील्ड फायरिंग रेंज मे सेना ने पाकिस्तान से सटे सीमा के पास सुदर्शन चक्र स्ट्राइक कोर का युद्धाभ्यास शुरू हुआ जिसे सिंधु सुदर्शन नाम दिया गया है।

 भारतीय सेना की सुदर्शन चक्र वाहिनी की ओर से सीमावर्ती जैसलमेर जिले की फील्ड फायरिंग रेंज में मारक क्षमता को परखा गया, इस अभ्यास में मुख्य रूप से लक्ष्य को पहचान कर तथा उसका पता लगाकर उसे रियल टाइम ऑपरेशन के जरिये नष्ट करने की क्षमता का प्रदर्शन किया गया। इस पूरे अभ्यास का मकसद था कि युध्द की सम्भावनाओ के दौरान  योजना कैसे बनाई जाती है कि लक्ष्य को कैसे और कितना तथा किस तरह से नष्ट करना है,जैसी युद्स कला की अपनी ताकत को परखना था । सुदर्शन चक्र कोर भोपाल बेस्ड है, और अंतरराष्ट्रीय सीमा के उस पर यानी कि दुश्मन के इलाके में घुसकर लड़ाई में पारंगत है।  सिंधु सुदर्शन युद्धाभ्यास में जमीन से जमीन और हवा से जमीन का 40 हज़ार सैनिको द्वारा किया जा रहा इस साल का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास कहा गया है

जाहिर है जब स्ट्राइक कोर का इस साल का यह सबसे बड़ा युद्धाभ्यास है तो उसमें आधुनिक हथियारों का भी उपयोग किया गया। युद्धाभ्यास के दौरान तय किये गए सटीक निशाने  गोलाबारी की क्षमताओं का एकीकृत प्रदर्शन को भी कसौटी पर जांच परखा गया। जिसे सेना के दक्षिणी कमांड के लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी ने खुद अपनी मौजूदगी में अपनी पैनी निगाहों और अनुभवों के आधार पर  जांचा। इस अभ्यास में आर्टिलरी, आम्र्ड और मैकेनाइज्ड फोर्सेज, आर्मी एयर डिफेंस, आर्मी एविएशन के प्रहारक अटैक हेलिकॉप्टर्स, तथा एयरफोर्स संसाधनों के साथ स्पेशल फोर्सेस के बीच सहज तालमेल का प्रदर्शन किया गया। रेगिस्तानी इलाके में 48 घंटे तक चले और दिसम्बर तक अलग अलकग कल्पनीय युध्द रणनीति कर साथ इस अभ्यास में भारतीय सेना की क्षमता, कौशल और परिचालन संबंधी तैयारियों का प्रदर्शन किया जा रहा है।

अभ्यास के दौरान संयुक्त हथियार सामंजस्य, कई रॉकेट लॉन्च सिस्टम के एकीकृत प्रदर्शन तो था कि सैह ही हाल ही में शामिल होने वाले सेल्फ प्रोपेल्ड आर्टिलरी गन सिस्टम के-9 वज्र भी मौजूद था। जिसे बोफोर्स के बाद स्ट्राइक कोर का गेम चेंजर भी कहा जा रहा है। युद्धाभ्यास में स्वदेशी अटैक हेलिकॉप्टर एएलएच मार्क 4 (एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर) ‘रुद्र’ की ताकत भी देखने को मिली । जमीन और हवा में दुश्मन को नेस्तनाबूद करने में सक्षम रूद्र 70 एमएम रॉकेट दागकर दुश्मन के टैंक, गोलियों से दुश्मन तथा मिसाइल को हवा में ही नेस्तनाबूद करके दिखा दिया कि हिंदुस्तान की ताकत को किसी से कमतर नही आंका जा सकता।

शायद रुद्र की इन्ही खासियत के चलते शॉर्ट नोटिस पर सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कार्रवाई को बखूबी अंजाम देने में इसे माहिर भी मन जाता है। वज्र के साथ स्वदेशी एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर 'रुद्र' के जरिये रियल टाइम वार ऑपरेशन की इस टुकड़ी की क्षमताओं को भी परखा गया। सेना सरकार की मेक इन इंडिया योजना पर आगे बढते हुए रक्षा उत्पादों के देश में ही निर्माण की पक्षधर है, स्वदेशी तेजस और सुखोई और मिग के अपगेंडेड वर्ज़न के साथ रुद्र के रूप में हमने जमाने को  दिखा भी दिया हैं। 

भले ही यह महज एक युद्धाभ्यास था लेकिन यहाँ सेना की इस टुकड़ी के जवानों की वो ताकत दिखी जिसकी कल्पना भी दुश्मनों को दहला देने के लिए काफी थी। और संकेत साफ था कि जब यह टुकड़ी ही इतनी क्षमताओं से भरी है तो यदि वायु सेना के मिग-29, जगुआर, सुखोई-30, मिराज -2000, स्वदेशी सुपर सोनिक विमान तेजस, एम आई-17 हेलिकॉप्टर की शक्ति भी इसके साथ किसी ऑपरेशन में जुड़ जाए तो दुश्मनों इनके गूंज मात्र से ही किस कदर थर्रा उठेगा। यहां बकायदा दुश्मन का काल्पनिक ठिकाना बनाया गया जहां की हर क्षमा बदलती युध्द की परिस्थितियों के साथ नई युध्द नीति बनाकर आगे बढ़ने और अपनी मारक क्षमता तथा ताकत दिखाई गयी। जिसे देखने के 

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