राजस्थान: स्वास्थ्य और कृषि मंत्री भी चिकनगुनिया और डेंगू के चपेट में

नई दिल्ली (15 सितंबर): राजस्थान में भी मौसमी बीमारियों के कहर के साथ डेंगू, चिकनगुनिया का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। यहाँ तक की प्रदेश के स्वास्थ्य और कृषि मंत्री भी इसकी चपेट में आ चुके हैं। जिसके बाद अंदाज़ा लगाया जा सकता है की इन बीमारियों ने आम आदमी को किस कदर अपनी चपेट में लिया होगा। सरकार ने भी माना की डेंगू से अब तक राज्य में 6 लोगों की मौत हो चुकी है। मामले की गंभीरता और अस्पतालों में लगातार बढ़ रही इन मरीजों की तादात के बाद अब सरकार ने भी सभी चिकित्सकों की छुट्टियों को भी रद्द कर दिया है।

विभाग की लापरवाही की पोल तब खुल गई, जब चिकनगुनिया ने खुद चिकित्सा मंत्री राजेंद्र राठौड़ और कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी को ही गिरफ्त में ले लिया। राजधानी के प्रमुख पांच अस्पतालों में ही पिछले 10 दिनों में मलेरिया के 7000 और ही चिकनगुनिया के 248 मरीज सामने चुके हैं। शहर में 100 से ज्यादा छोटे-बड़े अस्पताल हैं और सब में मौसमी बीमारियों के मरीजों की लम्बी कतार है।

चिकनगुनिया के साथ ही स्क्रब टाइफस भी प्रदेश के लोगों को बीमार कर रहा है। सितंबर में अब तक 45 से भी ज्यादा केसेज मिलने के बाद आंकड़ा 87 तक पहुंच चुका है। जबकि सर्फ्कारी आंकड़े ही बताते हैं की राज्य में स्क्रब टाइफस के 286 पॉजिटिव मरीजों में से 10 की मौत हो चुकी है। खुद इस बिमारी से कुछ ठीक होने के बाद चिकित्सा मंत्री भी मानते है की हालत गंभीर है लेकिन स्थिति नियंत्रण में है।

राजधानी जयपुर के अस्पतालों में मरीजों की वास्तविक संख्या अधिकारीयों द्वारा बताई जा रही संख्या से काफी अधिक है। पिछले 8 महीने में अब तक 7000 से भी ज्यादा मलेरिया के मामले सामने आ चुके हैं जबकि 286 स्क्रब टायफस, 248 चिकनगुनिया, 217 स्वाईन फ्ल्यू और 500 से भी ज्यादा डेंगू के गंभीर पीड़ित मरीज सामने आये हैं। चिकनगुनिया की जांच और इलाज के लिए 250 रूपये और स्क्रब टायफस के टेस्ट के 350 रूपये लिए जाते हैं लेकिन सरकार ने मरीजों की बढती तादात के चलते इन्ह्के टेस्ट को निशुल्क कर दिया है। बावजूद इसके अस्पतालों में मरीजों की संख्या ज्यादा और डॉक्टरों की संख्या काफी कम है जाहिर है मरीजों का गुस्सा तो निकलना ही था।

नगर निगम को फोगिंग के लिए लिखा जा चुका है। डेंगू के लिए एलाइजा ही कन्फर्म टेस्ट माना जाता है ऐसे में सभी अस्पतालों में इसे भेजने के निर्देश के बावजूद भी मरीजों को इसकी कमी के चलते इधर से उधर रेफर किया जा रहा है। उम्मीद की जा सकती है की सरकार जल्द ही इसे गंभीरता से लेगी वर्ना हालत के बेकाबू होते देर नहीं होगी।