Exclusive: राजस्थान में 3 लाख जिंदा लोगों को किया मृत घोषित

नई दिल्ली (11 जुलाई): क्या कोई भी सरकार इतनी बेरहम हो सकती है कि अपने खजाने में चंद सिक्के बढ़ाने के लिए गरीबों की जान ही लेने लग जाए। जिंदा लोगों को मरा हुआ बताने लगे। आपको यकीन नहीं होगा जब राजस्थान में वसुंधरा सरकार की काली करतूतों के किस्से सुनेंगे। यहां रातों-रात 3 लाख लोगों का डेथ सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया। मतलब सील ठप्पे के साथ सरकारी कागजों में उनको मार दिया गया। लेकिन न्यूज 24 की टीम ने अपनी

पड़ताल शुरू की तो मर चुके लोग सड़कों पर, सरकारी दफ्तरों में और अपने घरों में चीखते हुए मिले। उदयपुर के 21 हजार लोग रातों'रात मर गए। डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौगढ़, राजसमंद के 76 हजार लोग रातों-रात मर गए। कल तक भले चंगे लोग सरकारी दफ्तर से पेंशन पा रहे थे। गरीबी में ही सही लेकिन गुजर-बसर हो रही थी। लेकिन जनवरी में अचानक उन्हें कागजी तौर पर मार दिया गया।

आपको ताज्जुब होगा कि सिर्फ 500 और 700 रुपल्ली का सवाल था। सरकार ने गरीब लोगों का हक मारने के लिए उनकी जिंदगी को मौत में बदल डाला। गरीबों की ज़िंदगी से इतना घटिया मज़ाक इससे पहले कभी नहीं हुआ। पहचान पत्रों का पुलिंदा लेकर जिंदा लोग अपने पैरों पर चलकर सरकारी दफ्तरों में खड़े हैं और बीजेपी की हुकूमत कह रही है कि तुमलोग मर चुके हो। आधार कार्ड में तो फिंगर प्रिंट से लेकर आंखों की पुतलियों तक के निशान होते हैं। मिलाकर देख लीजिए कि वही आदमी है या कोई और। लेकिन उसी आधार कार्ड के आधार पर सब्सिडी छीनने की जुगत भिड़ा रही सरकार ने नीयत और इंसानियत दोनों को सूली पर टांग दिया है।

वीडियो:

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