लाल किले के बाद राजस्थान की ऐतिहासिक धरोहरों को संभालेंगे निजी कंपनियां

नई दिल्ली (3 मई): राजस्थान के एक दर्जन ऐतिहासिक किले और धरोहरों पर अब निजी कंपनियों का बोर्ड नजर आएगा। केंद्र सरकार के 'अडॉप्ट ए हेरिटेज' स्कीम के तहत बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए इन्हें प्राइवेट कंपनियों को सौंपा जाएगा।राजस्थान में ऐतिहासिक नाहरगढ़ और आमेर किले के साथ ही दर्जन भर से अधिक ऐतिहासिक किलों और स्मारकों को निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी हो रही है। योजना केंद्र सरकार के पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय की है, लेकिन इसमें राजस्थान सरकार की भी भागीदारी रहेगी। न्यूज़ 24 को मिले दस्तावेजों के मुताबिक पहले चरण में रानी पद्मिनी से जुड़े चित्तौड़गढ़ किले को रखरखाव के लिए निजी कंपनी को सौंपा जा सकता है।दूसरे चरण में गोल्डन सिटी जैसलमेर के सोनार किले तीसरे चरण में जयपुर की सबसे खुबसूरत और बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग की पसंदीदा जगह आमेर और नाहरगढ़ किले को निजी कंपनियों को सौंपा जाना है। इन सबके साथ ही भरतपुर का डीग पैलेस, अलवर का भानगढ़ किला, जोधपुर का मंडोर फोर्ट, धौलपुर का शेरगढ़ किला, पुष्कर का महल बादशाही और बूंदी का तारागढ़ फोर्ट भी "अडॉप्ट ए हेरिटेज" स्कीम के तहत निजी कंपनियों को सौंपा जाना है।"अडॉप्ट ए हेरिटेज" योजना के तहत निजी कंपनियों को इन जगहों पर कैफेटेरिया बनाना होगा, बैटरी वाली गाड़ियां चलानी होगी, अत्याधुनिक CCTV कैमरे लगाने होंगे, पर्यटक सूचना केंद्र बनाना होगा, लाइट और साउंड शो, पीने के पानी, साफ-सफाई और क्लॉक रूम जैसी सुविधाओं का इंतजाम करना होगा। इसके साथ ही कई भाषाओं में ऑडियो और वीडियो सुविधा भी देनी होगी।राज्य सरकार का दावा है कि इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि इस स्कीम को लेकर कई आशंकाएं भी उठ रही हैं। लोगों को अंदेशा है कि कहीं निजी कंपनियां कहीं पर्यटकों के जेब पर बोझ ना बढ़ा दे। वहीं कांग्रेस कह रही है कि ऐतिहासिक धरोहर गिरवी रखना वसुंधरा की फितरत है।राजस्थान में पर्यटन निगम के होटलों को निजी हाथों में सौंपने के फैसले को लेकर पहले भी वसुंधरा सरकार की खासी किरकिरी हो चुकी है। बाद में सरकार को पीछे तक हटना पड़ा था। अब सबकी नजर इस बात पर है कि ताजा मामले में राज्य सरकार विरोधियों को कैसे चुप कराएगी ?