राजस्थान और तेलंगाना में चुनाव प्रचार का आज आखिरी दिन, 7 दिसंबर को वोटिंग


न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (5 दिसंबर): राजस्थान और तेलंगाना में आज चुनाव प्रचार का आखिरी दिन है। आज शाम 5 बजे के बाद प्रचार का शोर थम जाएगा और उम्मीदवार सिर्फ घर घर जाकर ही वोट मांग सकेंगे। राज्य में 7 तारीख को वोट डाले जाएंगे और वोटों की गिनती 11 दिसंबर को होगी।



राजस्थान के सभी 200 सीटों पर शुक्रवार को वोटिंग होनी है। राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्भीक ढंग से कराने और मतदान केंद्रों पर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने सहित सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। विधानसभा चुनाव के लिए प्रदेश में मतदान सात दिसंबर को होगा।  मुख्य निर्वाचन अधिकारी आनंद कुमार ने बताया कि मतदान के लिए दो लाख से ज्यादा ईवीएम और वीवीपैट मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। किसी भी स्तर पर कोई तकनीकी समस्या ना आए, इसके लिए अधिकारियों को कई बार प्रशिक्षण दिए जा चुके हैं। कुमार ने बताया कि मॉकपोल के दौरान डाले गए मतों की संख्या के अनुसार पर्चियों की गणना की गई है और समस्त रिकार्ड भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सुरक्षित रखा गया है। मतदान के लिए तैयार सभी ईवीएम-वीवीपैट को स्ट्रांग रूम में कड़ी सुरक्षा में रखा है।  उन्होंने बताया कि दिव्यांगजनों की मदद के लिए प्रत्येक मतदान केंद्र पर दो-दो वालंटियर लगाने और क्षेत्रों में कानून एवं व्यवस्था मजबूत बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। राजस्‍थान देश का एक ऐसा इकलौता राज्‍य है, जहां पर दो दशकों से मतदाता सत्‍ता की बाजी पलट देते हैं। इस राज्‍य में 1998 के बाद किसी भी एक राजनैतिक दल को लगातार दो बार शासन करने का मौका नहीं मिला है। बीते दो दशकों में हुए चार विधानसभा चुनावों पर नजर डालें तो एक बार बीजेपी तो दूसरी बार कांग्रेस के हाथों सत्‍ता की बागडोर आई।



वहीं तेलंगाना की सभी 119 सीटों पर भी 7 दिसंबर को ही वोटिंग होनी है। निष्पक्ष और स्वतंत्र मतदान कराने के लिए राज्य चुनाव आयोग ने तमाम तैयारियां पूरी कर ली है। तेलंगाना की 119 सीटों पर होने वाले चुनाव के तीन दावेदार हैं, टीआरएस, कांग्रेस और बीजेपी। दरअसल मुकाबला कठिन तब हुआ जब बीजेपी को छोड़ टीआरएस विरोधी सभी पार्टियां एकजुट हो गईं। कांग्रेस ने तेल्गु देशम पार्टी और दूसरी छोटी पार्टियों के साथ मिलकर पीपुल्स फ्रंट बनाया, जिसे चंद्रशेखर राव के सामने एक कड़ी चुनौती माना जा रहा है। अगर ये प्रयोग सफल हो जाता है तो राष्ट्रीय स्तर पर भी इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है। इससे ये संदेश पूरे देश में जाएगा कि 2019 के आम चुनाव में बीजेपी-विरोधी पार्टियां मिलकर मोदी को हराने का माद्दा रखती हैं। इससे राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन बनाने की कोशिशों को बल मिलेगा और राज्य स्तर पर भी पार्टियां एक साथ आएंगी।