राजस्थान में पानी के लिए इंसान से लेकर जानवर तक परेशान

पप्पू बृजवाल, बाड़मेर (17 मई): राजस्थान के बाड़मेर जिला से 90 किलोमीटर दूर स्थित चांदे का पार गांव में मौजूद छोटा कुंआ ही लोगों की प्यास बुझाने का इकलौता जरिया है। दूर-दराज के इलाके से लोग पानी के इसी छोटे से कुएं के पास आते हैं और रस्सियों के जरिए कड़ी धूप में पानी निकालते हैं।


इस गांव में अपनी और परिवार की प्यास बुझाने के लिए महिलाओं को सुबह 4 बजे उठना पड़ता है। फिर इन महिलाओं का पानी के लिए सफर शुरू होता है। कड़ी धूप में मीलों दूर तक चलने के बाद लोगों को पानी नसीब होता है। कई बार तो गर्मी में पानी के लिए दर्जनों किलोमीटर लंबा सफर तय करने के बावजूद भी पानी नसीब नहीं होता।


इस गांव में पानी के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। इसके चलते ग्रामीणों ने कुएं खोद रखे हैं और इसी से पानी आता है। उसके लिए पूरे गांव की महिलाओं के अलावा बच्चे, पुरुष और बुजुर्गों को कतार में लगना होता है। हर कोई लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करता है। फिर कहीं जाकर एक टाइम के पीने के पानी का जुगाड़ हो पाता है।


इस गांव में पानी की कितनी कमी है, इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हो कि इस गांव की 70 साल की बुजुर्ग महिला भी पानी के लिए इस कुए पर पहुंच कर कतार में खड़ी नजर आ रही है। बाड़मेर के इस गांव की प्यास बुझाने के लिए साल 2013 में सरकार ने जीएलआर का निर्माण करवाया था, लेकिन पानी की कमी में यह जीएलआर खुद प्यासा है।


इलाके के लोगों ने गांव में पानी की व्यवस्था कराने के लिए जिला कलेक्टर से लेकर जल विभाग के अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन कोई हल नहीं निकला और आज भी ग्रामीण पानी की एक-एक बूंद को तरस रहे हैं। राजस्थान में इस समय आसमान से आग बरस रही है। बाड़मेर में तापमान 45 डिग्री को पार कर गया है। भीषण गर्मी में पानी की कमी से हाहाकार मच गया है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन पानी की उचित व्यवस्था कर पाने में अभी तक नाकाम रहा है।