लव, सेक्स और ब्लैकमेलिंग में थानाधिकारी भी था गिरोह का सदस्य

केजे श्रीवत्सन, जयपुर (17 सितंबर): सिरोही जिले के माउंट आबू में एक हाई प्रोफाइल ब्लैकमेलिंग में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। चौंका देने वाली बात यह है कि जिस थाने में मामला दर्ज हुआ है, उसके थानाधिकारी को ही इसमें आरोपी बनाया गया है।

माउंट आबू में होटल कारोबारी को ब्लैकमेल कर करीब 30 लाख रूपए वसूली के इस मामले में कुल 6 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है तथा इस मामले में दो आरोपियों को पुलिस ने गिरफतार भी कर लिया है। ये वहीं थानेदार रामचंद्रसिंह राठौड़ है जिस पर इस थाने में आने वाले लोगों को इन्साफ दिलाने की जिम्मेदारी थी लेकिन अपनी करतूतों के चलते यही अधिकारी इसी थाने में एक मुजरिम बन गए हैं।

एक नामी गिरोह के लोग जो सालों से सुनियोजित तरीके से बड़े व्यापारियों को लड़कियों से मिलवाकर दोस्ती, सेक्स और ब्लैकमेलिंग का खेल खेल रहे थे। शुरू से ही माउण्ट आबू थानाधिकारी रामचंद्रसिंह इस मामले को दबाने की कोशिश में रहे। जब मामला तुल पकड़ने लगा तो पुलिस अधीक्षक संदीपसिंह चौहान ने इसकी जांच करने के लिए माउण्ट आबू थानाधिकारी प्रीति कांकाणी को दी। बीच में किसी दबाव से यह जांच आगे नहीं बढ़ पाई। इस बीच पुलिस विभाग में तबादले हुए तो हवासिंह घुमरिया जोधपुर के आईजी बनकर आए और उन्होंने जांच तेज करने को कहा।

रिपोर्ट नए IG साहब को मिली जिसके बाद 8 सितम्बर को माउण्ट आबू थानाधिकारी रामचंद्रसिंह का माउण्ट आबू से सिरोही पुलिस लाइन में स्थानांतरित कर दिया था। जांच में यह बात भी सामने आई की यह गिरोह लड़कियों के माध्यम से बड़े कारोबारियों को फंसाता है और फिर उनकी अकेले में मुलाकात करवाता है। इसी बीच युवती कारोबारी पर दुष्कर्म से जैसे आरोप लगा देती है और फिर गिरोह कारोबारी को दबाव में लाकर बड़ी रकम वसूलता है।

मामले में अब तक खुलासा हुआ है कि इस पूरी घटना के पीछे महिलाओं के माध्यम से बड़े-बड़े व्यापारियों को फंसाने वाला एक गिरोह काम कर रहा था। घटना वाले दिन पुलिस अधिकारी रामचंद्रसिंह ने व्यापारी को महिला के साथ एक होटल से पकड़ा। इनके साथ महिला के परिजनों के नाम पर कुछ लोग भी थे, जो इस प्रकरण में व्यापारी से सौदेबाजी करते रहे। आरोपों पर विश्वास करें तो पुलिस की मौजूदगी में यह सौदा करीब 30 लाख रुपये में तय हुआ। इस गिरोह की माउण्ट आबू में और भी लोगों को फंसाने की योजना थी। जांच में यह बात भी सामने आई की माउण्ट आबू के तत्कालीन थानाधिकारी रामचंद्र सिंह राठौड भी इस गैंग के सदस्यों की सहायता करते थे।

फिलहाल पुलिस महानिरीक्षक हवासिंह घुमरिया के आदेश के बाद इस मामले में माउण्ट आबू के तत्कालीन थानाधिकारी रामचन्द्रसिंह, शिवानी, गोविंदराम मेघवाल, मोईनुल हक, गोविंदसिंह, गोपालसिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। अब तक जोधपुर के रहने वाले पत्रकार सैयद मोइनुल हक व गैंग की सदस्या शिवानी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अन्य आरोपियों की तालश जारी है। इनके पकड़ में आने से इस तरह की और भी वारदातें खुलने की संभावनाएं हैं। वैसे मोइनुल हक और युवती शिवानी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें पांच दिन के पुलिस रिमाण्ड पर सौंप दिया गया है।