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अशोक गहलोत और सचिन पायलट के 'हाथ' में राजस्थान की कमान

राजस्थान में आज से कांग्रेस राज का आगाज हो गया है। विधानसभा चुनाव में मिली जीत के बाद आज अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री और सचिन पायलट ने राज्य के उप मुख्यमंत्री के पद की शपथ ली

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (17 दिसंबर): राजस्थान में आज से कांग्रेस राज का आगाज हो गया है। विधानसभा चुनाव में मिली जीत के बाद आज अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री और सचिन पायलट ने राज्य के उप मुख्यमंत्री के पद की शपथ ली। राज्य के राज्यपाल कल्याण सिंह ने दोनों नेताओं को पद और गोपनियता की शपथ दिलाई। इस मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह, मल्लिकार्जुन खड़गे, ज्योतिरादित्य सिंधिया, नवजोत सिंह सिद्धू, जितिन प्रसाद समेत कई नेता मौजूद थे।  वहीं विपक्षी एकता के प्रदर्शन के रूप में कर्नाटक के सीएम एचडी कुमारस्वामी, टीडीपी नेता चंद्रबाबू नायडू, एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार, प्रभुल्ल पटेल, शरद यादव, नैशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, झारखंड मुक्ति मोर्चा हेमंत सोरेन, जीतनराम मांझी और डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन मंच पर मौजूद रहे। खास बात ये रही की राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया भी इस शपथ ग्रहण समारोह में पहुंची। हालांकि मध्य प्रदेश में कांग्रेस को समर्थन देने वालीं बीएसपी सुप्रीमो मायावती और एसपी अध्यक्ष अखिलेश यादव इस शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हुए।

आपको बता दें कि अशोक गहलोत तीसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने हैं। वह 1998 में पहली बार मुख्यमंत्री बने और 2008 में दूसरी बार मुख्यमंत्री का पदभार संभाला। उप मुख्यमंत्री बने पायलट फिलहाल राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं। वह लोकसभा सदस्य और मनमोहन सिंह सरकार में मंत्री रह चुके हैं। वह अपने जमाने में कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत राजेश पायलट के पुत्र हैं। राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जीत मिलने के बाद मुख्यमंत्री पद के चयन को लेकर लंबी खींचतान हुई। गहलोत और पायलट दोनों इस पद की दौड़ में शामिल थे। मैराथन बैठकों और गहन मंथन के बाद बीते 14 दिसंबर को कांग्रेस अध्यक्ष ने गहलोत को मुख्यमंत्री और पायलट को उप मुख्यमंत्री नामित करने का फैसला किया।

लंबे समय से राजनीति में सक्रिय अशोक गहलोत राजस्थान में काफी लोकप्रिय रहे हैं और उन्हें 'राजनीति का जादूगर' और 'मारवाड़ का गांधी' जैसे उपनामों से भी बुलाया जाता है। साल 2013 के राजस्थान विधानसभा चुनाव और फिर 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद भी अशोक गहलोत ने राज्य में अपनी पार्टी को प्रासंगिक बनाए रखा। राजस्थान में ‘राजनीति का जादूगर’ माने जाने वाले गहलोत ने 2018 के राज्य विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बहुमत के जादुई आंकड़े के करीब लाने में अहम भूमिका निभाई है।

सचिन राजनीति में ज्यादा पुराने तो नहीं हैं लेकिन युवाओं में काफी पसंद किए जाते हैं। सचिन इस बार टोंक विधानसभा से विधायक चुने गए हैं। इससे पहले वह दो बार सांसद रह चुके हैं। हालांकि, 2014 की 'मोदी लहर' में सचिन लोकसभा चुनाव हार गए थे। सचिन पायलट ने पहली बार 14वीं लोकसभा में दौसा से जीत हासिल की थी। तब वह सबसे कम उम्र के सांसद थे, उस वक्त सचिन की उम्र मात्र 26 वर्ष थी, इसके बाद वह 2009 में अजमेर से लोकसभा सांसद चुने गए और इस बार टोंक से विधायक चुने गए हैं।

ज्यादा जानकारी के लिए देखिए न्यूज 24 की ये रिपोर्ट...

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