किसके होंगे सचिन पायलट, अजमेर के या राजस्थान कांग्रेस के?

संजीव त्रिवेदी, नई दिल्ली(2 अक्टूबर): राजस्थान में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की जोर-शोर से चल रही तैयारियों में उपचुनाव का पेंच फंस गया है । इस उपचुनाव की खेप ने खास तौर से कांग्रेस को दुविधा में डाल दिया है। सिटिंग सांसदों की मौत से अलवर और अजमेर की लोकसभा सीटें खाली हो गई हैं और मंडलगढ़ विधान सभा की सीट पर भी उपचुनाव होना है। इन तीनो सीटों पर जीत कैसे दर्ज की जाए अब विधान सभा चुनाव से पहले कांग्रेस और बीजेपी इस माथापच्ची में लगे हुए हैं। उम्मीदवारी को लेकर बाकी किसी सीट पर कोई विशेष दुविधा नहीं लेकिन अजमेर की सीट ने कांग्रेस की नींद हराम कर दी है ।

क्या सचिन अजमेर सीट से फिर आजामाएंगे किस्मत: साल 2014 के चुनाव में बीजेपी ने राजस्थान की सभी सीटें जीत ली थीं और अजमेर में सांवरलाल जाट ने तब के सिटिंग सांसद और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट को बड़े आराम से हरा दिया था । लेकिन हाल ही में सांवरलाल जाट की मौत के बाद खाली हुई सीट को लेकर अब सवाल उठ रहा है कि प्रदेश कांग्रेस इकाई की जिम्मेदारियों में मशगूल सचिन इस बार अजमेर से कांग्रेस के प्रत्याशी होंगे या नहीं ।

सोच में पड़ा कांग्रेस आलाकमान: कांग्रेस अलाकमान की दुविधा ये है कि अजमेर में कांग्रेस के सबसे बेहतर उम्मीदवार तो सचिन ही साबित होंगे लेकिन अगर वो उपचुनाव में उतरते हैं तो एक साथ कई मुश्किलों सामने आ जाएंगी । अगले साल होने वाले विधान सभा चुनाव की तैयारी कर रहे सचिन की प्रदेश अध्यक्ष की भूमिका बुरी तरह प्रभावित होगी क्योंकि उपचुनाव से पहले दो महीने सचिन को अजमेर के लिए निकालने होंगे । अगर जीत हुई तो जाहिर है कांग्रेस को विधान सभा चुनाव में एक बढ़त मिलेगी लेकिन अगर नतीजे उल्टे आए तो कांग्रेस के लिए विधान सभा चुनाव से पहले ये एक बड़ा झटका होगा । उम्मीद की जा रही है कि सिंपैथी वोटों को ध्यान में रखते हुए बीजेपी नेतृत्व सांवरलाल जाट के परिवार से ही किसी व्यक्ति को मैदान में उतारेगी ।

कांग्रेस आलाकमान इस विकल्प पर भी विचार कर रही है कि वो सचिन पर दाव ही न लगाए । हालांकि ऐसा करने से प्रदेश कांग्रेस के कई नेता मानते हैं कि प्रदेश में मैसेज गलत चला जाएगा जिसका नुकसान कांग्रेस को 2018 के विधान सभा चुनाव में भी हो सकता है ।

अशोक गहलोत और सचिन की आपसी रस्साकशी भी है फैक्टर : राजस्थान की सियासत पर नजर रखने वाले इस मामले में एक पेंच राजस्थान कांग्रेस के आंतरिक समीकरण से भी जोड़कर देख रहे हैं । अजमेर में माली समुदाय का एक बड़ा वोट बैंक हैं जो पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कहा ही मानता है । सचिन और गहलोत के संबंधों को देखते हुए कुछ लोग भीतरघात की आशंका से इंकार नहीं करते । सचिन अगर मुश्किल में पड़े तो जाहिर है तात्कालिक फायदा अशोक गहलोत को ही होगा । हालांकि फिलहाल वो अपना सारा समय साल के आखिर में होने वाले गुजरात चुनाव में ही लगा रहे हैं ।