राजस्थान: एमजी अस्पताल में 2 महीने में 90 बच्चों की मौत

केजे श्रीवत्सन, जयपुर (2 सिंतबर): राजस्थान में बांसवाड़ा के एमजी अस्पातल में दो महीने में 90 बच्चों की मौत का सनसनीखेज आंकडा सामने आया है। नवजातों की मौत के पीछे गर्भवती महिलाओं में पोषाहार की कमी का हवाला दिया जा रहा है, लेकिन सवाल है कि जब जिले के एक भी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक भी गायनोकॉलिजिस्ट नहीं है तो गर्भवती महिलाओं को पोषाहार से संबंधित जानकारी कौन देगा।

राजस्थान के बांसवाड़ के महात्मा गांधी अस्पताल में जुलाई और अगस्त में 90 नवजातों की सांसे थम गई। यूं तो हर महीने अस्पताल में जन्म लेने वाले कई बच्चों की मौत हो रही थी, लेकिन हालिया दो महीने के आंकड़े डरावने हैं।

- अप्रैल में 222 डिलीवरी केस में 20 नवजात की मौत - मई मे 219 डिलीवरी केस में 18 नवजात की मौत - जून में 206 डिलीवरी केस में 26 नवजात की मौत - जुलाई में 249 डिलीवरी केस में 50 नवजात की मौत - अगस्त में 242 डिलीवरी केस में 40 नवजात की मौत

डॉक्टर हर महीने जन्म के बाद ही 15 फीसदी बच्चों की मौत को समान्य बताते हैं, लेकिन जुलाई और अगस्त में मौत का आंकड़ा सामान्य बात की बात पर सवाल खड़े कर रहे हैं। अब अस्पताल के डॉक्टर जांच का हवाला दे रहे हैं। बांसवाडा अस्पातल में नवजातों की मौत के आंकड़ों में हुए इजाफे पर पर सूबे के स्वास्थ्य मंत्री ने जांच की बात कही है।

अब जांच रिपोर्ट जब आएगी तब आएगी, लेकिन 2 महीने में 90 नवजातों की मौच चौंकाने वाले ही। बताया जा रहा है कि नवाजातों की मौत के पीछ गर्भवती महिलाओं का कुपोषण है। डिलीवरी से पहले गर्भवती महिलओं को सही पोषाहार नहीं मिल रहा है जो डिलीवरी के दौरान नवजातों के मौत की वजह बन रही है।

बांसवाडा जिले में मौजूद कुल 21 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 52 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक भी गाइनिकोलॉजिस्ट नहीं है। ऐसे में गर्भवती महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान सार-संभाल और पोषाहार की कमी, जैसे  न्यूट्रिशन, विटामिन और बेहतर दवाइयों से महरूम रह जाती हैं। जिसका नतीजा बांसवाड़ा अस्पताल में बच्चों की मौत का आंकड़ा है। ऐसे में सवाल है कि जब सरकार गर्भवति महिलओं को जरूरी पोषाहार उपलब्ध कराने में ही नाकाम दिख रही है तो सूबे के स्वास्थ्य मंत्री किस जांच की बात कह रहे हैं।