श्रीलंका में बारिश और बाढ़ से जन-धन की भारी तबाही, भारत राहत में जुटा

नई दिल्ली (21 मई): श्रीलंका में मूसलाधार बारिश के बाद आई भयंकर बाढ एवं भूस्खलन से 70 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इस आपदा से देश में करीब 4 लाख लोग घर छोड़ने को मजबूर हो गये हैं। देश में 25 साल में पहली बार सबसे खतरनाक स्थिति पैदा हुई है। श्रीलंका के विदेश मंत्रालय के अनुसार भारतीय राहत जहाज आईएनएस सुनयना कोच्चि से सामान लेकर आज कोलंबो पहुंचा।

भारत ने विशेष प्रकार की नौकाएं, गोताखोरी के उपकरण, चिकित्सा सामग्री, बिजली जेनरेटर, स्लीपिंग बैग जैसी राहत सामग्रियों से लदे नौसेना के दो जहाज- आईएनएस सुनयना और निगरानी जहाज आईएनएस सतलुज तथा एक सी-17 विमान श्रीलंका भेजा है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन केंद्र के मुताबिक भूस्खलन त्रासदी स्थल अरनायके में कम से कम 127 लोग अब भी लापता हैं। राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना ने श्रीलंकाइयों से बाढ़ प्रभावित को आश्रय, नकद या भोजन प्रदान करने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा, खाद्यान्न, कपड़े और राशन के दान के साथ ही प्रभावित लोगों के प्रति भारी सहानुभूति दिख रही है।

श्रीलंका के 22 जिलों में 3,75,604 लोग विस्थापित हैं।  देश को अंतरराष्ट्रीय सहायता मिलने लगी है। करीब 300,000 लोग लगभग 500 सरकारी राहत केंद्रों में रह रहे हैं। इसी बीच जापान ने जापान इंटरनेशनल कोआपरेशन एजेंसी के माध्यम से कंबल, पानी के टैंक, जलशुद्धि वाले उपकरण, जेनरेटर , इलेक्ट्रिकल केबल समेत आपात राहत सामग्री भेजी है। आस्ट्रेलिया की सरकार यूनीसेफ के माध्यम से 500,000 डॉलर का और नेपाल ने 100,000 डालर के योगदान की घोषणा की है। अमेरिका ने सुरक्षित पेय जल के लिए तीन साल के लिये 10 लाख डालर वाले एक कार्यक्रम की पेशकश की है।