रेलवे ने अधिकारियों से बेहतर काम लेने के लिए शुरू की जोन्स रेटिंग

नई दिल्ली ( 20 फरवरी ): भारतीय रेलवे ने बेहतर काम की अपेक्षा में 16 जोन्स की रेटिंग का काम शुरू कर दिया है। रेलवे ऐसा अपने अधिकारियों को ज्यादा जवाबदेह और काम के प्रति समर्पित बनाने के लिए कर रहा है। अगर वरिष्ठ अधिकारी अगर अपने काम को गंभीरता से नहीं लेगें तो इसका असर उनके करियर और प्रमोशन पर पड़ सकता है।

रेलवे द्वारा अप्रैल से दिसंबर 2016 के बीच की गई रेटिंग में दक्षिण-पूर्वी रेलवे टॉप पर है जिसका मुख्यालय कोलकाता में है और सबसे निचले पायदान पर है उत्तर-पूर्वी रेलवे, जिसका हेड ऑफिस गोरखपुर में है। दिलचस्प बात यह है कि उत्तर रेलवे, जिसका मुख्यालय रेलवे बोर्ड के दफ्तर से कुछ किलोमीटर की दूरी पर है, इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर है।

रेलवे मंत्री सुरेश प्रभु की अगुवाई में इस नई व्यवस्था के तहत रेलवे का अप्रेजल सिस्टम भी निजी सेक्टर की तरह हो गया है। शीर्ष अधिकारियों के करियर का सीधा संबंध कमाई में उनके योगदान और ट्रेनों के समय पर होने जैसी चीजों से है।

रेलवे जोन्स की रेटिंग 17 प्रमुख परफॉर्मेंस बिंदुओं(KPIs) पर आधारित है, जिनमें पैसेंजर ट्रैफिक और माल ढुलाई आदि से जुड़ी परफॉर्मेंस शामिल हैं। KPI को जनरल मैनेजरों, डिविजनल रेलवे मैनेजरों और रेलवे जोन के विभाग प्रमुखों के ऐनुअल परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट्स(APARs) का हिस्सा बनाया गया है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'टारगेट को ध्यान में रखते हुए इन बिंदुओं पर जोन्स के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाता है।'