चलती ट्रेन से गायब हुआ सामान, अब मुआवजा देगी रेलवे

नई दिल्ली (23 दिसंबर):  यूं तो ट्रेन में सफर करते वक्त सामान की सुरक्षा की जिम्मेदारी यात्रियों की ही है पर शमीम आलम को उनके सामान चोरी होने के मामले में रेलवे को मुआवजा भरना होगा। शमीम देहरादून से दिल्ली की यात्रा पर निकले थे। देहरादून जिला कंज्यूमर फोरम ने रेलवे विभाग को सामान चोरी होने के एवज में मुआवजा देने का आदेश दिया है। फोरम की तरफ से कहा गया है कि सामान की चोरी रेलवे के अधिकारियों की लापरवाही का नतीजा है।

हालांकि, रेलवे की तरफ से तर्क देते हुए कहा गया कि इंडियन रेलवेज ऐक्ट के तहत यात्रियों को होने वाले किसी भी नुकसान के लिए वह जिम्मेदार नहीं है। फोरम ने इस पर कहा कि ट्रेन के भीतर सुरक्षात्मक माहौल बनाए रखने की जिम्मेदारी रेलवे की है, लिहाजा वह इससे बच नहीं सकता। फोरम का नेतृत्व करते हुए प्रेजिडेंट बलबीर प्रसाद और सदस्या अल्का नेगी ने रेलवे को 33,528 रुपये मुआवजे के तौर पर व 10 हजार रुपये मुकदमेबाजी के खर्च के तौर पर प्रदान करने का आदेश दिया।

शमीम आलम उत्तराखंड हज कमिटी के पूर्व प्रमुख रह चुके हैं। वह 28 फरवरी 2012 को देहरादून से दिल्ली के लिए निकले थे। शमीम के सामान में जूते-चप्पल, कपड़े, सीटी-स्कैन रिपोर्ट, दवाइयां, पहचान पत्र आदि थे।

सुबह जब शमीम उठे तो अपना सामान गायब पाया। शमीम ने दिल्ली पहुंचकर रेलवे पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई। कोई राहत न मिलने पर शमीम ने कंज्यूमर कोर्ट में मुआवजे की मांग करते हुए केस कर दिया।

शमीम ने आरोप लगाया ट्रेन के भीतर अनाधिकृत लोग चढ़े थे, जिन्हें टीटीई ने डिब्बे में आने से नहीं रोका। उन्होंने बताया कि मेरे जैसे एक और यात्री का सामान भी चोरी हुआ। इस पर फोरम ने आदेश दिया कि रेलवे को 30 दिन के भीतर उक्त राशि अदा करने का आदेश दिया।