चीन तक जाएगी भारतीय रेलवे, 10 हजार फीट तवांग तक...

नई दिल्ली ( 5 फरवरी ): रेल मंत्रालय ने चीन से सटे पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश में रेलवे का बड़ा ढांचा खड़ा करने की योजना तैयार कर ली है। अरुणाचल प्रदेश के तवांग को देश के अन्य इलाकों से जोड़ने के लिए रेलवे यहां तीन ट्रैक तैयार करने के लिए सर्वे शुरू करने जा रहा है। रेल मंत्रालय का का कहना है कि इन प्रोजेक्ट्स को अमलीजामा पहनाने में 50,000 से लेकर 70,000 करोड़ रुपये तक की लागत आएगी। चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा जताता रहा है। ऐसे में भारत की ओर से अरुणाचल में रेल ढांचा मजबूत करना रणनीतिक और सामरिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है।

केंद्रीय रेल राज्य मंत्री राजन गोहेन ने शनिवार को कहा, 'रक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर हम बॉर्डर तक विस्तार की तैयार कर रहे हैं। तीन नई रेलवे लाइनों के लिए हमने सर्वे करने शुरू कर दिए हैं। ये तीन रेल लाइनें हैं, भालुकपुंग से तवांग, सिलाफाटर से बामा और मुर्कोंगसेलेक से पासीघाट होते हुए रूपई।

नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे के जनरल मैनेजर (कंस्ट्रक्शन) एच.के. जग्गी ने कहा कि ट्रैक की ऊंचाई 500 से 9000 फुट तक की होगी। ट्रैक बिछाने से पहले हम मिट्टी की स्थिति और जियोलजिकल कंडीशन्स की जांच करेंगे। रेलवे इस परियोजना के जरिए पूरे अरुणाचल प्रदेश को ही रेल नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी में है। 1 फरवरी को पेश किए गए आम बजट में डूमडूमा से सिमालगुड़ी, नामसाइ औक चौउखाम होते हुए वाकरो (96 किमी), डांगरी से रोइंग (60 किमी), लेखापानी से नामपोंग (75 किमी) लाइनों का सर्वे किया जाएगा। इसके अलावा तिनसुकिया से पासीघाट तक 300 किलोमीटर लंबा ट्रैक बनेगा।