रेलवे ने बनाया 'प्लान 100', अब दिल्ली से मुंबई और हावड़ा की दूरी होगी 5 घंटे कम

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (20 जून): भारतीय रेलवे अति व्यस्त दिल्ली-हावड़ा और दिल्ली-मुंबई रूट की रेलगाड़ियों का वक्त पांच घंटे तक कम करने की योजना पर काम कर रहा है। इसके लिए रेलवे अगले चार साल में 14,000 करोड़ रुपये इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करेगा। रेलवे की ओर से अपने 100 दिनों के प्लान में जो 11 प्रस्ताव रखे गए हैं उनमें दिल्ली-हावड़ा और दिल्ली-मुंबई रूट की ट्रेनों के रूट का रनिंग टाइम पांच घंटे तक कम करना भी शामिल है। इसके लिए रेलवे तत्काल प्रभाव से काम करेगा और इस प्लान को 31 अगस्त तक लागू कर दिया जाएगा।

गौरतलब है कि भारतीय रेलवे के कुल यात्रियों में 30% यात्री केवल इन दो रूट पर चलते हैं, जबकि रेलवे को मिलने वाले कुल किराये का 20% केवल इस रूट की रेलगाड़ियों से ही आता है। अभी दिल्ली-हावड़ा रूट पर चलने वाली सबसे तेज ट्रेन को अपनी यात्रा पूरी करने में 17 घंटे लगते हैं, जबकि दिल्ली-मुंबई रूट की सबसे तेज ट्रेन को अपनी यात्रा पूरी करने में 15.5 घंटे लगते हैं। इन दोनों ही रूट पर भारतीय रेलवे का प्लान रेलगाड़ियों का रनिंग टाइम क्रमश: 12 घंटे और 10 घंटे घटाने का है।

रेलवे ने अपने प्रस्तावों को स्वीकृति के लिए कैबिनेट की आर्थिक मामलों की कमेटी को भेज दिया है। रेलवे ने इन रूट पर रेलगाड़ियों की रफ्तार को 130 किमी/घंटे से बढ़ाकर 160 किमी/घंटे करने का प्रस्ताव भी रखा है। सभी केंद्रीय मंत्रालय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव के बाद 100 दिन का प्लान तैयार कर रहे हैं। रेलवे का यह प्लान भी इसी नए प्रस्ताव का हिस्सा है। नई दिल्ली-हावड़ा रूट की लंबाई 1525 किमी है। वहीं, नई दिल्ली- मुंबई रूट की लंबाई 1,483 किमी है। इन रूट को क्रमश 6,684 करोड़ और 6,806 करोड़ रुपये में विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है।

इसके अलावा रेलवे ने अपने 100 दिन के प्लान में 10 अन्य लक्ष्य भी रखे हैं। इनमें एक 'गिव इट अप' भी है। इसके जरिये रेल मंत्री पीयूष गोयल रेलवे टिकट पर मिलने वाली सब्सिडी छोड़ने के लिए लोगों को प्रेरित करेंगे। कई सारे सीनियर सिटिजन उनके आग्रह के बाद सब्सिडी छोड़ भी रहे हैं। सब्सिडी छोड़ने के लिए रेलवे एक प्रचार अभियान भी चलाएगा। 100 दिन के प्लान में रेलवे का वह प्रस्ताव भी शामिल है, जिसमें कई रूट डेवलप करने के लिए प्राइवेट कंपनियों को  मौका देने की बात कही गई थी। इसके अलावा रेलवे में 10 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के डिजिटल कॉरिडोर को 700 मेगाहर्ट्ज की फ्रीक्वेंसी तक ले जाया जाएगा। इससे न सिर्फ कोहरे में ट्रेनों के संचालन में सुधार आएगा और उनकी सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि इससे उनकी गति में भी सुधार आएगा।