पूर्वोत्तर में रेलवे के विस्तार का बड़ा प्लान...

नई दिल्ली (27 मई): उत्तर पूर्व  में शुक्रवार को प्रधानमंत्री ने रेलवे के नक्शे पर दो और नई लाइन को राष्ट्र के नाम समर्पित किया। असम के सिलचर से मिजोरम से भैरवी तक और सिलचर असम से ही मणिपुर के जिरभुम तक। इन इलाकों के जुड़ने के साथ ही पूर्वोतर का राज्य मिजोरम और मणिपुर भी भारतीय रेल के नक्शे में जुड़ जाएगा।

इससे न सिर्फ इन इलाकों को देश के दूसरे हिस्सों से सम्पर्क हो पाएगा, बल्कि चीन जिस हिसाब से आगे से आगे बढ़ कर हमे आंखे दिखा रहा है, भारत के पूर्वोंतर के राज्यों से अरुणाचल तक की पहुंच भी आसान हो जाएगी। 

अरुणाचल प्रदेश - पड़ोसी असम से लगी सीमा पर रंगापारा से मुरकॉंगस्लेक और बलीपारा से भुलाकोपॉग तक के 362 किलोमीटर तक के रुट को रेलवे ने ब्राड गेज लाइन से जोड़ दिया है। इस लाइन के बनने के साथ ही भारत के नक्शे में अरुणाचल को रेल लाइन के साथ कनेक्टिविटी मिल गई है। 

अब रेलवे का अगला कदम है मुरकॉगस्लेक को पासीघाट तक जोड़ने का। लगभग 30 किलोमीटर की यह लाइन भारत और चीन के बीच सबंधों को देखते हुए, खासा मायने रखती है और यही वजह है कि रक्षा मंत्रालय इस रुट की फंडिंग कर रहा है। 

एक  बार यह लाइन अरुणाचल के पासीघाट तक पहुंच जाए तो ब्रह्मापुत्रा नदी और उत्तरी घाट पुरी तरह से रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा। लेकिन उसके बाद भी रेल नेटवर्क चीन से लगी अरुणाचल प्रदेश की सीमा से कुछ किलोमीटर दूर रहेगा। 

त्रिपुरा- राजधानी अगरतला- लामडिंग सिलचर और कुमारघाट अगरतल्ला लाइन इसी साल मार्च में रेलवे के नक्शे पर आई हैं। इस लाइन को बराक वैली भी कहते है, पहले केवल सामान ही इस लाइन से ढोया जाता था, लेकिन अब पैसेंजरो की आवाजाही भी शुरु हो गई है। 

मणिपुर- राजधानी इंफाल का महत्पूर्ण इलाका जिरभूम। असम के सिलचर से जिरभूम तक की दूरी है 60 किलोमीटर। आगे इस लाइन को तुपुल तक ले जाने की योजना है। 98 किलोमीटर तक की जिरभुम से तुपुल तक की दूरी तय करने में अभी रोड से लगते है तकरीबन 10 घंटे जो रेलवे लाइन के बिछने के बाद रह जाएगी महच 3 घंटे की। यह 2019 में बन कर तैयार होगी। आधी लाइन 27 मई को शुरु हो गई।

मिजोरम- सभी पूर्वोत्तर की राजधानी को जोड़ने के लिय सबसे अंतिम दक्षिण छोर पर है मिजोरम की राजधानी आइजोल। इसमें अहम पड़ाव है, सिलचर से भैयरवी रेल लाइन। इस महीने से ये शुरु हो रहा है, जिसे प्रधानमंत्री हरी झंडी दिखआएंगे। आगे इस लाइन को भैरवी से सायरंग (51.38 किलोमीटर)  और फिर आइजोल तक ले जाने की कोशिश है। रेलवे का लक्ष्य है कि 2018 तक मणिपुर के सायरंग तक से जाया जाएगा। 

नागालैंड - दिमापुर से जुबजा तक लाइन बननी है। लेकिन अभी समय निर्धारित नहीं किया है। 

मेघालय - राजधानी शिलॉग है। यहां भी इस साल के अंत तक रेल लाइन पहुंच जाएगी। सबसे पहले मिशन है रेलवे लाइन को तेतलिया पहुंचाने का और फिर आगे बर्निहाट तक पहुंचाने का। जो कि खासा पहाड़ी इलाका है, लेकिन वहां के लोग इसका विरोध कर रहे है। वहीं रेल लिंक गारो हिल के मेदीछरानगावं तक पहुंच गया है।  

सिक्किम - सेवक से रैंगपो तक ममता ने उद्घाटन किया था। उनकी सोच थी। सबसे अंत में ये लाइन पूरी होगी। 2020 तक का लश्र्य है। काम शुरु हो चुका है।  नार्थ इस्ट से सातों बहन राज्यों को जोड़ने का काम 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य है मोदी सरकार का।